मानसून से पहले प्रशासन सतर्क, बाढ़ और अतिवृष्टि से निपटने की तैयारियों की संभागायुक्त ने की समीक्षा | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

आगामी मानसून को दृष्टिगत रखते हुए संभागायुक्त धनंजय सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संभाग के सभी कलेक्टरों के साथ वर्षा पूर्व तैयारियों की समीक्षा की तथा बाढ़ एवं अतिवृष्टि जैसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में छिंदवाड़ा कलेक्ट्रेट के एनआईसी कक्ष से कलेक्टर हरेंद्र नारायण, डीआईजी राकेश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक अजय पांडेय, जिला पंचायत सीईओ अग्रिम कुमार, एडीएम धीरेंद्र सिंह, वनमंडल अधिकारी, डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड्स, सभी एसडीएम एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में सभी कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में की गई वर्षा पूर्व तैयारियों की जानकारी प्रस्तुत की। संभागायुक्त ने राजस्व विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय-सीमा में पूर्ण करने तथा किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हांकन कर अद्यतन जानकारी संधारित करने, बाढ़ प्रभावित होने वाली नदियों, नालों, तालाबों और बड़े बांधों की सूची तैयार करने तथा उनके सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने को कहा। साथ ही मानसून पूर्व जल निकासी तंत्र, नालियों, तालाबों एवं तटबंधों की सफाई, डिसिल्टिंग और सुदृढ़ीकरण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने पर जोर दिया गया।

संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में जिला आपदा प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित कर आपदा प्रबंधन कार्ययोजना को अद्यतन किया जाए। ऊर्जा, संचार, सड़क और पुल जैसी आवश्यक सेवाओं की समीक्षा कर संबंधित विभागों के नोडल अधिकारियों की जानकारी संकलित की जाए। बाढ़ संभावित एवं दुर्गम क्षेत्रों में खाद्यान्न, पेयजल, जीवनरक्षक दवाइयों, पशु चिकित्सा सुविधाओं, चारा और भूसे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की समीक्षा के दौरान वर्षा जनित महामारी, डायरिया एवं अन्य संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए अग्रिम तैयारियां रखने, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए चिकित्सकीय दल गठित करने को कहा गया। संभावित राहत शिविरों के लिए स्थान चिन्हित कर उनकी सूची तैयार रखने तथा बचाव कार्यों में उपयोग होने वाली नाव, मोटरबोट, रबर बोट एवं अन्य उपकरणों की उपलब्धता और संचालन क्षमता का सत्यापन करने के निर्देश भी दिए गए।

संभागायुक्त ने खोज एवं बचाव दलों के प्रशिक्षण, सिविल डिफेंस इकाइयों की तैयारी तथा 24 घंटे सक्रिय आपदा नियंत्रण केंद्र संचालित करने पर विशेष बल देते हुए कंट्रोल रूम से संबंधित अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक करने के निर्देश दिए। बड़ी नदियों वाले जिलों को जलस्तर की निरंतर निगरानी रखने तथा बांधों एवं जलाशयों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में कम से कम 48 घंटे पूर्व सूचना देने के लिए प्रभावी चेतावनी तंत्र विकसित करने को कहा गया। साथ ही जलमग्न सड़कों एवं पुल-पुलियों पर चेतावनी बोर्ड लगाने, सर्पदंश उपचार के लिए एंटीवेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा नगर निगमों एवं नगरीय निकायों द्वारा खुले मेनहोल और बोरवेल बंद कराने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।

बैठक में स्कूलों, आंगनवाड़ी भवनों एवं छात्रावासों का सुरक्षा की दृष्टि से गहन निरीक्षण कर सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त करने तथा जर्जर भवनों के संबंध में शासन के निर्देशानुसार समय-सीमा में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। अंत में सभी जिला कलेक्टरों को संबंधित विभागों के समन्वय से बाढ़ एवं अतिवृष्टि से बचाव और राहत के लिए विस्तृत जिला स्तरीय एक्शन प्लान तैयार करने तथा पूरे मानसून काल में पूर्ण सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।

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