सैय्यद मुजीबुद्दीन, पुसद यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT;
क्या इंसानो की आबादी कम थी जो अब मुसाफिरों की जगह जानवरों को बस स्टैण्ड पुसद के अंदर आना पड़ रहा है? यह सब सिस्टम की खराबी का नतीजा है कि शहर के हर रोड चौराहे पर आज आपको आवारा जानवरों से जंग करनी पड़ रही है। ट्रैफिक पुलिस को इंसानों के ट्रैफिक को कंट्रोल करने में दम निकल रही है और ऊपर से रास्तोंरपर आवारा जानवरों की मुसीबत गले पड गई है। वह समझ नहीं पा रहे हैं कि इन जानवरों की ट्रैफिक को कैसे कंट्रोल करें?
नगर परिषद पुसद के जानवर कोण्डवाड़े सिर्फ नाम के रह गए हैं। शहर में रास्तों पर आवारा जानवरों के झुंड ट्रैफिक में बाधाएं खड़ी कर रहे हैं। इससे साफ़ ज़ाहिर होता है की नगर परिषद आरोग्य विभाग के कर्मचारी अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में नाकाम साबित हो गए हैं।जिसका नतीजा 9 फरवरी की शाम 7 बजे पुसद के एसटी बस स्टैण्ड में देखने को मिला है।
यहाँ देखते ही देखते कुछ मोकाट गायें ने सीधे मुसाफिरों की वेटिंग सिटों के इतराफ़ में बड़े सुकून से अपना कब्ज़ा जमा लिया था। जानवरों के अचानक बस स्टैण्ड में घुसने की वजह से कुछ डरे हुए मुसाफिरों को बस स्टैण्ड से बाहर की ओर भागना पड़ा तो कुछ मुसाफिरों की काफी महेनत और मशक्कत के बाद जानवरों के कब्ज़े से पुसद बस स्टैण्ड को आज़ाद कराया गया। पुसद बस स्टैंड के अंदर इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी यहां के बस स्टैण्ड अधिकारी और कर्मचारीयों को इस बात की भनक तक नहीं लगी। क्या यहां के चौकीदार बेहोश थे? कक्या क्या उन पर कोई कारवाई की जाएंगी? क्या नगर परिषद अपने सिस्टम में सुधार लाएंगी? क्या पुसद की जनता आवारा बेलगाम जानवरों की परेशानियों से निजाद पाएंगी? ऐसे कई सवाल आज पुसद वासियों के सामने आरहे हैं।
