मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड की हरी-भरी वादियों में स्थित पातालकोट एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है, जहां भारिया जनजाति के लोग निवास करते हैं।

इनके विकास के लिए शासन द्वारा विभिन्न मदों से करोड़ों रुपये की राशि आवंटित की जाती है, लेकिन विभागों में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण पातालकोट का विकास भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।
यही वजह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आज भी पातालकोट और वहां रहने वाले भारिया जनजातीय लोगों की स्थिति जस की तस बनी हुई है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं।
मामला तामिया विकासखंड की ग्राम पंचायत कारेयाम रातेड अंतर्गत ग्राम चढ़ा ढाना का है, जहां आरईएस विभाग से स्वीकृत 1.45 किलोमीटर सुदूर सड़क का निर्माण कार्य लगभग 50 लाख रुपये की लागत से किया जा रहा है। सड़क निर्माण के अर्थवर्क में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। बिना बेस और जीएसबी (GSB) किए केवल मिट्टी के ऊपर पन्नी बिछाकर कंक्रीट डाल दिया जा रहा है।
इस तरह ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के इंजीनियर और ठेकेदार शासन की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कार्य स्थल पर न तो कोई इंजीनियर मौजूद है और न ही ठेकेदार, मजदूरों के भरोसे ही पातालकोट में सड़क निर्माण किया जा रहा है।
यदि बारिश में पहाड़ की मिट्टी गिरती है तो सड़क का कुछ हिस्सा पूरी तरह बंद हो सकता है। ग्रामीणों ने मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

