कैमोर उद्योगीक नगरी प्रदूषण के मामले में प्रदेश में सबसे आगे, शासन प्रशासन की उदासीनता का खमियाजा भुगत रहे हैं लोग | New India Times

अविनाश द्विवेदी/शेरा मिश्रा, कटनी (मप्र), NIT; 

कैमोर उद्योगीक नगरी प्रदूषण के मामले में प्रदेश में सबसे आगे, शासन प्रशासन की उदासीनता का खमियाजा भुगत रहे हैं लोग | New India Times​कटनी जिले का कैमोर उद्योगीक नगरी प्रदूषण के मामले मे मध्यप्रदेश की अब्बल उद्योगीक नगरी मानी जा रही है,  जहां प्रदूषण के साथ साथ अवैध कार्यो की वजह से आम नागरिक प्रताड़ित हैं। यह कैमोर उद्योगीक नगरी विजयराघवढ़ विधानसभा का ही एक हिस्सा है, जहां से चार चार मंत्री मध्यप्रदेश शासन में बैठे हैं लेकिन सभी मंत्री अपने अपने कर्तव्यों का निर्वाहन सही ढंग से नहीं कर पा रहे हैं, जबकि विजयराघवढ़ के मतदाताओं ने इस बात को लेकर अपना अमूल्य मत इन समाज के ठेकेदारों को दिया था ताकि क्षेत्र के विकास के साथ साथ आम आदमी की समस्याओं का निराकरण हो किन्तु पद के लोभी नेताओं को आम जनता की तकलीफ दर्द नजर नही आया। पदों के साथ नेताओँ की चिकनी चुपडी बडी बडी बातें ही नजर आईं, वास्तविकता मे कार्य नजर नही आया। ​कैमोर उद्योगीक नगरी प्रदूषण के मामले में प्रदेश में सबसे आगे, शासन प्रशासन की उदासीनता का खमियाजा भुगत रहे हैं लोग | New India Timesएसीसी सीमेंट प्लांट ने अपनी प्रताड़ना से कैमोर क्षेत्र में कोहराम मचा रखा है। कैमोर वार्ड न 5,6,7, खलवारा बाजार बडारी गांव आदि जगहों पर सीमा से अधिक प्रदूषण उड रहा है जिसके लिए कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं, वही अगर शिकायत की भी जाती है तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण में होने की झुठी बात जांच में लिखी जाती है। आरोप है कि  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी एसीसी से फायदा उठाने के लिए शासन प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं। कटनी के अधिकारी यह भूल चुके हैं कि वह शासकीय कर्मचारी है उन्हें जनता के हितों में काम करना है।बताया जाता है कि हराम की कमाई के लिए एसीसी के हर नियम विरुद्ध कार्यो मे अपना सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

जन प्रतिनिधि भी गुलामियों की बेड़ियों में जकड़े

लोगों का कहना है कि विजयराघवढ़ के चारों मंत्री व अन्य राजनेता एसीसी की गुलामी में जकड़े हुए नजर आ रहे हैं। जनता की भावनाओं का किसी को ज्ञान नहीं है,  सिर्फ नेताओं का ज्ञान अपने आप के लिए है। जबकि एसीसी क्षमता से अधिक सीमेंट का उत्पादन कर नियमों की अनदेखी कर रही है। एसीसी में लगा कन्वर्टर बेल्ट की भी अनुमति नही है, एसीसी को रोपबे की अनुमति केन्द्र सरकार द्वारा दी गई थी। स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने के बजाये बाहरी लोगों को कार्य दिया जाता है। एसीसी द्वारा ठेकेदारी प्रथा चला कर मजदूरों के खून पसीने की कमाई में ठेकेदार हो हिस्सेदार बना दिया गया है। वहीं एसीसी सीमेंट की खदान की वजह से हनुमान मंदिर का रास्ता बंद कर दिया गया है। खदानों पर कोई सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। आए दिन घटनाएं घटित हो रही हैं। जादातर घटनाओं मे जंगली जानवरों की मौत हो रही है।

एसीसी की सेवा लेने वाले अधिकारी

एसीसी रेस्ट हाउस, बंगला आदि की निःशुल्क सेवा लेने वाले अधिकारी जनता की नहीं बल्कि एसीसी की ही सुनते हैं और शिकायत करने वालों पर झूठे मामले लगाकर फंसा दिया जाता है। शासकीय अधिकारी शासकीय भवन होते हुए भी एसीसी की सेवा लेते हैं जो नियमानुसार गलत है किन्तु गलत सही का फैसला करने वाले ही जब आंख पर पट्टी बांधे हों तो न्याय की उम्मीद करना मुर्खता होगी। एसीसी की गुंडा गर्दी पर शासन की मुहर लगा कर एसीसी के हौसले बुलंद किए जाते हैं। शिकायतकर्ता एसीसी की अनेकों गम्भीर शिकायत कर हार जाता है, उन्हीं शिकायतों को लेकर एसीसी मैनेजमेंट से ब्लैक मेलिंग कर पैसा खाते आ रहे हैं जन प्रतिनिधि अधिकारी।

एसीसी सीमेंट मैनेजमेंट बे खौफ होकर नियम कानून की धज्जियां उडा रहा है। एसीसी ने अपनी चौखट पर जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों को जब से चौकीदार बनाया तब से आम जनता की कोई सुनवाई नहीं होती, सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी अपनी सेवा का लाभ एसीसी को दे रहे हैं, जबकि अगर अधिकारी और जन प्रतिनिधि चाहते तो अनेकों ऐसे मामले हैं जिनकी चांज के पश्चात प्लांट हैड पर मामला दर्ज किया जा सकता था।

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