इम्तियाज़ चिश्ती/अविनाश द्विवेदी, दमोह (मप्र), NIT;
मध्य प्रदेश के समस्त विभागों के संविदा कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। उन्होंने शिवराज सरकार को जगाने के लिए तरह तरह के जतन किये पर सरकार से अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला जिससे खफा संविदा कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने संविदा संयुक्त मोर्चा के 21 विभागों के संविदा कर्मचारियों ने शहीद दिवस को कुछ अलग तरीके से मनाते हुए शहीदों के मुखोटे लगाकर संविदा कर्मियों को फांसी पर चढ़ते हुए बताया और अपनी मांगे रखी।
दमोह जिले में बैठे ये संविदा कर्मचारी सरकार को जगाने और अपनी मांगें मनवाने के लिए क्या कुछ नही किया, भीख भी मांग ली, घंटी भी बज ली, पूजा अर्चना भी कर ली, पर मध्यप्रदेश की शिराज सरकार है कि सुनती ही नहीं है। हर जतन करने के बाद अब संविदा कर्मचारियों ने शहीद दिवस पर जिला कलेक्टर के ऑफिस के सामने 21 विभागों के समस्त कर्मचारी एक ही पंडाल के नीचे आ गए और अपने चेहरों पर शहीदों के मुखोटे लगाकर काल्पनिक फांसी पर चढ़ गए। इनका मानना है कि सरकार हमारे साथ बहुत गलत कर रही है। शहीद दिवस पर भारत मां के अमर शहीदों के चित्र पर माल्यर्पण करने के पश्चात उनकी याद में काल्पिनक रूप से संविदा नीति को फांसी दी गई। उन्हें याद करते हुए उनके आजादी में योगदान को याद किया कि कैसे देश के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों को हंसते-हंसते न्योछावर करने वाले तीन वीर सपूतों ने अपना बलिदान दिया। इस मौके पर तीन संविदा कर्मियों को शहीदों के मुखौटे पहना पर सूली पर चढाया गया। इस दौरान पूरा पंडाल ‘’इंकलाब जिन्दाबाद‘’ के नारों से गूँज गया। इस वक़्त शिवराज सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां हैं, एक ओर उन्हें आगामी चुनाव में अपनी साख बचाना है तो वही दूसरी तरफ सरकार से नाराज कर्मचारियों की अपनी मांगें हैं। इनकी तादाद देखी जाए तो वक़्त आने पर सरकार बनाने या मिटाने में अहम रोल अदा कर सकते हैं। फैसला सरकार के हाथों में है, अब देखने लायक होगा कि सरकार को जगाने में ये संविदा कर्मचारी कितना कामयाब होते हैं।
