अशफाक कायमखानी, जयपुर, NIT;
राजस्थान में सूदखोरों व सट्टा कारोबारियों के मजबूत गठजोड़ के आगे प्रदेश का कमजोर तबका तो पिस ही रहा था लेकिन अब सीकर में सूदखोर गिरोह के एक व्यक्ति के मूलधन से कई गुना धन वसूल करने व उसके मकान की दवाब बनाकर रजिस्ट्री कराने के बावजूद उन्हें और धन देने के दवाब के चलते भाजपा नेता प्रेमसिंह बाजोर के मलकेड़ी गावं के स्वामी दम्पति के आत्महत्या करने के बाद मिले सुसाइड नोट को लेकर स्थानीय पुलिस अधिक्षक अखिलेस कुमार की पहल पर मामूली सी पुलिस कार्यवाही करने पर ही अनेक पीडित लोग एक-एक करके पुलिस तक पहुंच कर रिपोर्ट दर्ज कराने लगे हैं। कल सीकर पुलिस अधिक्षक के पास राजस्थान के नामवर भाजपा लीडर व पुर्व विधायक केशरदेव बाबर ने स्वयं हाजिर होकर 18 सूदखोरों के खिलाफ परिवाद पेश करके उनके पुत्र से सूद के नाम पर करोड़ों रुपये व अनेक प्लाटस के कागजात कराने के बावजूद उनका लड़का पिछले एक साल से इनके डर से गायब होने का आरोप लगाया है। पुलिस ने पुर्व विधायक बाबर के परिवाद पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।
राजस्थान के दलित लीडर व सत्तारुढ भाजपा के पुर्व विधायक केसरदेव बाबर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उनका बेटा पिछले एक साल से घर नहीं आया है। सूदखोरों ने तीन से तीस रुपये सेंकड़ा ब्याज लगाकर बेटे दिनेश से डेढ करोड़ से ज्यादा रुपया हड़प लिए हैं।खाली चेक, स्टाम्प ही नहीं कई जमिनों की रजिस्ट्री भी सूदखोरों ने अपने नाम करवा ली है। इसके बाद भी सूदखोरों का पैसा पुरा नही होने पर बेटा दिनेश बिना बताये ही घर से चला गया है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से अपने बेटे को बचाने की गुहार लगाई है। बाबर ने अपनी रिपोर्ट में शहर के नामी 18 सूदखोरों के नाम भी बताये हैं।
भाजपा के पुर्व विधायक बाबर के सूदखोरों के खिलाफ परिवाद देने के बाद पुलिस अधीक्षक अखिलेस कुमार सिंह ने बताया कि बाबर ने अठारह जनों के खिलाफ नामजद परीवाद पेश किया है जिसको थाने में भेजकर रिपोर्ट दर्ज कर जांच करने के आदेश दिये गये हैं।
कुल मिलाकर यह है कि कुछ सफेद पोश लोगों की शह के बल पर सटोरियों व सूदखोरों के मजबूत गठजोड़ ने पिछले कुछ सालों से युवा पीढी को अपने जाल में फंसाकर अनेक घरों को बरबाद करके दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर कर दिया है। पीडित लोग भय के मारे अव्वल तो इनके खिलाफ बोलने को खड़े होते ही नहीं थे। अगर बाबर जैसा कभी खड़ा होने की जुगत कर भी लेता था तो इन सूदखोरों की शासन-प्रशासन में मजबूत पकड़ के सामने आखिरकार हथियार डालकर इनके मुहं से निकली बोली पर ही हां कहना होता था। सीकर पुलिस अधीक्षक अखिलेस कुमार सिंह की पहल पर इन सूदखोरों से परेशान दम्पति की आत्महत्या करने के बाद इनके खिलाफ कार्यवाही करना जो शुरु किया गया तो अनेक पीडित लोग पुलिस तक पहुंचने लगे हैं। फिर बताते हैं कि सैकड़ों पीडित अभी तक सूदखोरों के खोफ व भय के चलते इनके खिलाफ आने की हिम्मत जुटा नही पा रहे हैं। अगर सरकार वास्तव में जनता कोनइन सूदखोरों से मुक्ति दिलाना चाहती है तो वह नामी गिरामी पुलिस अधिकारी एन एम दिनेश जैसे अधिकारी के देखरेख में एक टीम अलग से गठित करके इह गठजोड़ को पुरी तरह तोड़कर जनता को राहत दिलाकर दूध का दूध व पानी का पानी अलग करे अन्यथा यह कुछ समय बाद फिर से सिर उठाकर अवाम का जीना मुहाल कर सकते हैं।
