कासिम खलील, बुलढाणा(महाराष्ट्र), NIT;
एक खेत में स्थित निर्माणाधीन 40 फुट गहरे सूखे कुएं में एक भालू रात में गिर गया था। इस घटना की जानकारी बुलढाणा वन विभाग को मिलने के बाद शाम में वनविभाग की रेस्क्यू टीम घटनास्थल पर पहूंची और 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद भालू को पिंजरे के माध्यम से बाहर निकाला गया।
बुलढाणा शहर से कुछ ही किलो मिटर के अंतर पर “ज्ञानगंगा अभयारण्य” है जहां बड़ी संख्या में हिंस्त्र व वन्यजीवों का बसेरा है। कई बार हिंस्त्र प्राणी जंगल छोड़ कर रिहायशी बस्तियों की तरफ आ जाते हैं। विगत 1 फरवरी की रात में बुलढाणा तहसिल अंतर्गत ग्राम भादोला निवासी मंगेश ठेंग के देवली शिवार के खेत में स्थित कुएं में एक 3 वर्षीय आयु का नर जाती का भालू गिर गया। यह कुआं अभी निर्माणाधिन है जो सपाट होने के कारण भालू इस कुएं में जा गिरा होगा ऐसा कयास लगा जा रहा है।
शाम के समय कुएं से आवाज़ आने पर किसी चरवाहे ने झाँक कर देखा तो उस को इस सूखे कुएं में भालू नजर आया, जिसकी सुचना बुलढाणा वनविभाग को दिया गया।सूचना मिलने पर डीएफओ बी.टी.भगत, एसीएफ बी.ए.पोल के मार्गदर्शन में बुलढाणा वन विभाग की रेस्क्यू टीम के आरएफओ गणेश झोले, संजय राठौड, सुनिल राठौड, पी.एम.बूटे, ईश्वर गवारगुरु, समाधान मांटे, संदीप इंगले, देवीदास वाघ, सुधीर कांबले व गवई रेस्क्यू के साजो सामान के साथ रात 7 बजे घटनास्थल पर पहुंचे और रात के अंधेरे में अपना रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। भालू कुएं से बाहर निकलने के प्रयास में किसी तरह आधी ऊंचाई तक चढा हुआ था, ऐसी स्थिति में उसे बेहोश क्या जाता तो उसकी जान को खतरा हो सकता था या वह नीचे गिरने से गंभीर रूप से जख्मी हो सकता था। इस लिए कुएं में पिंजरा छोड़ा गया और भालू को पिंजरे में जाने के लिए विवश किया गया। रेस्क्यू टीम की बड़ी जद्दोजहद के बाद भालू पिंजरे में पहुंचते ही कैद हो गया और फिर पिंजरे को बाहर निकाल लिया गया।
रात 7 बजे से आरंभ हुआ यह रेस्क्यू ऑपरेशन रात 11 बजे खत्म हुआ जो पुरे 4 घंटे चला। तत्पश्चात भालू को बुलढाणा के वन विभाग में लाया गया जो ज़ख़्मी हो गया था। आज 3 फ़रवरी को पशुवैद्यकीय अधिकारी डॉ.सोनूने को बुलाकर ज़ख़्मी भालू का उपचार किया गया। फिल्हाल 2 दिन और भालू के उपचार किये जाने की जानकारी आरएफओ गणेश झोले ने देते हुए बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर भालू को जंगल में छोड़ दिया जाएगा।

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