मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

जुन्नारदेव थाना क्षेत्र के सुआम गांव में लापरवाही की कीमत जब किसी की जान से चुकानी पड़े, तो दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। सुआम गांव में ऐसा ही दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जहां महीनों से खुला पड़ा एक खतरनाक गड्ढा दो साल की मासूम बच्ची खुशीता की जिंदगी निगल गया। घर के आंगन में अपनी किलकारियों से माहौल खुशनुमा करने वाली मासूम को जरा भी अंदाजा नहीं था कि घर से थोड़ी ही दूरी पर खुला गड्ढा उसकी जान ले लेगा। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।
खेलते-खेलते काल के मुंह में समाई मासूम
रोज की तरह खुशीता अपने घर के आसपास खेल रही थी। परिजनों की नजर कुछ ही पल के लिए उस पर से हटी और वह खेलते-खेलते घर से दूर निकल गई। गांव में लंबे समय से बिना किसी सुरक्षा या चेतावनी के खुला पड़ा एक गड्ढा उसके लिए मौत का कुआं बन गया। जब परिजनों को उसके गायब होने का पता चला तो उन्होंने खोजबीन शुरू की। कुछ ही देर बाद वह गड्ढे में मिली, लेकिन तब तक घर में गूंजने वाली उसकी खिलखिलाहट हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी। घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई।
पिता का सीना चीरता दर्द और बेबस आंसू
इस हादसे ने एक पिता की दुनिया उजाड़ दी। बदहवास पिता अपनी लाडली बेटी के शव को गोद में लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। पिता की आंखों में जहां अपनी बच्ची को खोने का असहनीय दर्द था, वहीं दूसरी ओर सिस्टम की लापरवाही को लेकर गहरा आक्रोश भी नजर आया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस गड्ढे को भर दिया जाता या उसे घेर दिया जाता, तो शायद आज एक मासूम की जान नहीं जाती।
पुलिस की मुस्तैदी, मामले की जांच शुरू
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमा हरकत में आया। प्रधान आरक्षक दिलीप उपाध्याय और आरक्षक महेश उईके तत्काल मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
खुशीता की मौत सिर्फ एक परिवार का व्यक्तिगत नुकसान नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों के लिए भी गंभीर सवाल खड़ा करती है। सवाल यह है कि क्या इस मासूम की जान जाने के बाद प्रशासन जागेगा और ऐसे खुले गड्ढों को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?

