बीआरसी की नियुक्ति और कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, कई मामलों में जांच की मांग | New India Times

त्रिवेंद्र जाट, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

बीआरसी की नियुक्ति और कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, कई मामलों में जांच की मांग | New India Times

देवरी विकासखंड में ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) की नियुक्ति एवं कार्यप्रणाली को लेकर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ताओं ने वर्तमान बीआरसी हरिकृष्ण चौबे की नियुक्ति से लेकर स्कूल निरीक्षण, खरीदी प्रक्रिया, भवन उपयोग और पाठ्यपुस्तक वितरण तक कई बिंदुओं पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन डीपीसी गिरीश मिश्रा द्वारा अपने करीबी एवं रिश्तेदार को नियमों को दरकिनार कर बीआरसी पद पर नियुक्त किया गया। शिकायतकर्ताओं ने दोनों के रिश्ते और नियुक्ति प्रक्रिया की जांच की मांग की है।

मूल पद पर उपस्थिति को लेकर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं के अनुसार बीआरसी हरिकृष्ण चौबे मूल रूप से शासकीय हाई स्कूल डोंगर सलैया में माध्यमिक शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं। आरोप है कि बीआरसी की जिम्मेदारी संभालने के बावजूद वे मूल विद्यालय में भी उपस्थिति दर्ज कराते हैं और कार्य करते हैं। शिकायतकर्ताओं ने इसे दोहरी व्यवस्था बताते हुए कहा है कि इससे विद्यालय में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

बर्तन और लैपटॉप खरीदी पर अनियमितता के आरोप
शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए बर्तन खरीदी में भी अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि कुछ स्कूलों में बर्तन खरीदे नहीं गए, जबकि कुछ स्थानों पर गुणवत्ताहीन सामग्री खरीदे जाने की शिकायत है। संबंधित अभिलेख और भुगतान की जांच की मांग की गई है।
इसी तरह बीआरसी कार्यालय के लिए खरीदे गए लैपटॉप के भुगतान पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि लैपटॉप की कीमत करीब 42 हजार रुपये होने के बावजूद लगभग 1.17 लाख रुपये का भुगतान किया गया। शिकायत में खरीद प्रक्रिया और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है।

स्कूल निरीक्षण नहीं करने का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने बीआरसी पर क्षेत्र के शासकीय स्कूलों का नियमित निरीक्षण नहीं करने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यार्थियों की पढ़ाई और मूलभूत व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए नियमित निरीक्षण आवश्यक है।

कन्या शाला भवन के उपयोग पर विवाद
शासकीय कन्या शाला तिलक वार्ड के भवन को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को दिए जाने को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि भवन के उपयोग से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिकायतकर्ताओं ने भवन आवंटन की प्रक्रिया और नियमों की जांच की मांग की है। उनके अनुसार इस संबंध में स्कूल की एक शिक्षिका द्वारा भी शिकायत की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

कई स्कूलों में पुस्तकें अधूरी पहुंचने की शिकायत
देवरी विकासखंड के कई शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को पूरी पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पुस्तकों के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और विभाग को वितरण व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।

उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने बीआरसी की नियुक्ति, मूल पद पर उपस्थिति, स्कूल निरीक्षण, बर्तन एवं लैपटॉप खरीदी, कन्या शाला भवन के उपयोग तथा पाठ्यपुस्तक वितरण सहित सभी मामलों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से की है। साथ ही संबंधित दस्तावेजों की जांच कर आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। बीआरसी हरिकृष्ण चौबे एवं संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना उचित होगा।

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