मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

रेलवे स्टेशन हिरदागढ़ में एसटीबीए (स्टेशन टिकट बुकिंग एजेंट) का पहला टेंडर सागर अवस्थी नामक व्यक्ति को मिलता है, जो मूलतः हिरदागढ़ का रहने वाला है। यह व्यक्ति 7 महीने भी यह कार्य सुचारू रूप से नहीं चला पाता। इनके द्वारा रेल यात्रियों से दुर्व्यवहार करना, गाली देना, शराब पीकर टिकट देना, टिकट के ज्यादा पैसे लेना, रात्रि में ट्रेन के समय टिकट देने नहीं आना जैसी अनेक शिकायतें होती हैं, जिसके कारण शिकायतें ज्यादा प्राप्त होने पर रेलवे विभाग इन्हें इस टेंडर से 4 अगस्त 2026 को टर्मिनेट कर देता है।
रेलवे विभाग पुनः टेंडर प्रक्रिया के तहत एसटीबीए के लिए नए आवेदकों के फॉर्म जमा करता है। इसमें यह टर्मिनेट हुआ व्यक्ति भी शामिल होता है। आश्चर्य की बात है कि इस टर्मिनेट हुए व्यक्ति का फॉर्म सबमिट भी हो जाता है।
अज्ञात सूत्रों से पता चला है कि नौ लोगों के फॉर्म जमा हुए थे, जिसमें से तीन लोगों के फॉर्म शॉर्टलिस्ट हुए हैं। इसमें भी इस टर्मिनेट व्यक्ति सागर अवस्थी का फॉर्म शामिल है।
इससे यह सवाल उठता है कि क्या इसकी रेलवे के अधिकारियों के साथ सांठगांठ है, जिनकी कथित कृपा से टेंडर प्रक्रिया के नियमों के विरुद्ध जाकर भी रेलवे अधिकारी इस व्यक्ति को दोबारा टेंडर दिलवाने में लगे हुए हैं।
जबकि यात्रियों द्वारा पूर्व में कई बार सागर अवस्थी की शिकायत की जा चुकी है। फिर भी रेलवे विभाग के अधिकारी पता नहीं क्यों इस टर्मिनेट हुए व्यक्ति को ही एसटीबीए का ठेका दिलाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
जबकि इस व्यक्ति के कारण रेलवे यात्रियों को अत्यधिक परेशानी हुई है। इस व्यक्ति को लेकर यात्रियों में काफी आक्रोश है।
रेलवे के नियम के अनुसार, यदि कोई ठेकेदार काम में लापरवाही करता है, खराब प्रदर्शन करता है या नियमों का उल्लंघन करता है और रेलवे द्वारा उसका ठेका टर्मिनेट (रद्द) किया जाता है, तो उसे भविष्य के टेंडर से ब्लैकलिस्ट या अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। ऐसे व्यक्ति रेलवे की टेंडर प्रक्रिया में दोबारा शामिल नहीं हो सकते हैं।
फिर भी इस व्यक्ति का नियम विरुद्ध दोबारा टेंडर प्रक्रिया में शामिल होना यह दर्शाता है कि रेलवे विभाग के अधिकारी भी इस टर्मिनेट व्यक्ति पर विशेष मेहरबान हैं।
अब सवाल यह है कि जब पूर्व में यात्रियों द्वारा उक्त व्यक्ति के खिलाफ कई शिकायतें की गई थीं और रेलवे विभाग ने उसका टेंडर टर्मिनेट कर दिया था, तो उसे दोबारा टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने की अनुमति किस आधार पर दी गई? रेलवे विभाग को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

