RGPV के तीन हिस्सों में विभाजन के फैसले पर विधायक आतिफ अकील ने जताई आपत्ति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को लिखा पत्र | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

RGPV के तीन हिस्सों में विभाजन के फैसले पर विधायक आतिफ अकील ने जताई आपत्ति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को लिखा पत्र | New India Times

 राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) का तीन हिस्सों में विभाजन कर भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में अलग,अलग विश्वविद्यालय बनाए जाने के प्रस्ताव को लेकर भोपाल उत्तर से विधायक आतिफ अकील ने आपत्ति जताई है। उन्होंने इस संबंध में मध्यप्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र भेजकर फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि RGPV प्रदेश की तकनीकी शिक्षा की रीढ़ है और पिछले करीब 26 वर्षों में विश्वविद्यालय ने प्रदेश को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय को तीन हिस्सों में बांटने से तकनीकी शिक्षा व्यवस्था कमजोर होने के साथ विद्यार्थियों, कर्मचारियों और पूर्व छात्रों के सामने भी कई तरह की समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

पत्र में विधायक ने विश्वविद्यालय का नाम पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर होने का उल्लेख करते हुए कहा कि नाम बदलने और विश्वविद्यालय को तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों में विभाजित करने से प्रदेश की जनता में असंतोष है। उन्होंने राजीव गांधी के तकनीकी शिक्षा, कंप्यूटर और दूरसंचार के क्षेत्र में योगदान का भी उल्लेख किया है।

RGPV के तीन हिस्सों में विभाजन के फैसले पर विधायक आतिफ अकील ने जताई आपत्ति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को लिखा पत्र | New India Times
RGPV के तीन हिस्सों में विभाजन के फैसले पर विधायक आतिफ अकील ने जताई आपत्ति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को लिखा पत्र | New India Times

आतिफ अकील ने अपने पत्र में तर्क दिया कि RGPV को तीन विश्वविद्यालयों में विभाजित करने पर प्रत्येक संस्थान में अलग-अलग कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, उपकुलसचिव, सहायक कुलसचिव सहित विभिन्न अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियां करनी होंगी। इसके अलावा नए भवन, इंफ्रास्ट्रक्चर और कार्यालयों की आवश्यकता भी पड़ेगी।

उन्होंने दावा किया कि इन व्यवस्थाओं पर सरकार पर लगभग 500 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है। विधायक ने सवाल उठाया कि जब प्रदेश सरकार वित्तीय स्थिति का हवाला देकर कई क्षेत्रों में खर्च कम करने की बात कर रही है, तो नए विश्वविद्यालयों के गठन पर इतना अतिरिक्त खर्च क्यों किया जा रहा है।

विधायक ने पत्र में उज्जैन को प्राथमिकता दिए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उज्जैन और आसपास के क्षेत्र में पहले से ही बड़ी संख्या में कॉलेज संचालित हैं। उन्होंने प्रदेश के अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि अधिकांश राज्यों में एक ही तकनीकी विश्वविद्यालय संचालित है, ऐसे में मध्यप्रदेश में RGPV को तीन हिस्सों में बांटने की आवश्यकता पर पुनर्विचार होना चाहिए।

आतिफ अकील ने कहा कि RGPV केवल एक विश्वविद्यालय नहीं बल्कि प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों की तकनीकी शिक्षा और पहचान से जुड़ा संस्थान है। उन्होंने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मांग की है कि विश्वविद्यालय का नाम बदलने तथा इसे तीन हिस्सों में विभाजित करने संबंधी निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए।

उन्होंने प्रस्तावित नामों के स्थान पर भोपाल में राजीव गांधी मध्यभारत, उज्जैन में राजीव गांधी मालवा और जबलपुर में राजीव गांधी महाकौशल नाम रखे जाने पर भी पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

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