संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ, ग्वालियर (मप्र), NIT:

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर डॉ. भगवत सहाय शासकीय महाविद्यालय, ग्वालियर में श्रद्धा, आस्था एवं गरिमामय वातावरण में गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, माँ सरस्वती की वंदना एवं गुरु पूजन के साथ हुआ। इस दौरान पूरा महाविद्यालय परिसर भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा की भावना से ओत-प्रोत नजर आया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. आर.के. श्रीवास्तव एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. आर.के. उपाध्याय (भारतीय शिक्षा मंडल) ने अपने प्रेरक उद्बोधन में भारतीय संस्कृति में गुरु के सर्वोच्च स्थान पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से नैतिक मूल्यों, अनुशासन और संस्कारों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान का संचार ही नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव भी रखते हैं।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मीना श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का ऐसा प्रेरणादायी पर्व है, जो गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ-साथ उच्च नैतिक आदर्शों एवं मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने गुरु महिमा पर प्रभावशाली भाषण, ओजस्वी कविताओं एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा की गौरवशाली विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. कमल हिण्डोलिया ने किया, जबकि अंत में डॉ. ज्योति शर्मा ने सभी अतिथियों, प्राचार्य, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों तथा आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं गुरु के प्रति सम्मान की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने वाला प्रेरणादायी एवं यादगार अवसर साबित हुआ।

