थोक सब्जी मंडी में दलदल से किसान परेशान, टैक्स वसूली जारी लेकिन सुविधाओं का अभाव | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

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स्थानीय थोक सब्जी मंडी इन दिनों बदहाल स्थिति का सामना कर रही है। पहली ही बारिश ने नगर पालिका के विकास और व्यवस्थाओं के दावों की पोल खोलकर रख दी है। मंडी परिसर में चारों ओर कीचड़ और दलदल फैला हुआ है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से अपनी उपज बेचने आने वाले किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि मंडी में पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है और किसान फिसलकर गिरने को मजबूर हैं।

थोक सब्जी मंडी में दलदल से किसान परेशान, टैक्स वसूली जारी लेकिन सुविधाओं का अभाव | New India Times

टैक्स वसूली में मुस्तैदी, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव

स्थानीय किसानों और व्यापारियों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन मंडी में आने वाले प्रत्येक वाहन और व्यापारियों से नियमित रूप से टैक्स वसूल रहा है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर स्थिति पूरी तरह शून्य है। मंडी में न तो वाहनों के लिए व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था है और न ही किसानों के बैठने के लिए कोई उचित स्थान उपलब्ध है।

अधूरे निर्माण और गड्ढों ने बढ़ाई परेशानी

मंडी परिसर में पाइपलाइन विस्तार के लिए खोदे गए गड्ढों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। गड्ढों को भरने के बजाय खुला छोड़ दिए जाने से मंडी में वाहनों का आवागमन बाधित हो गया है। सब्जियों से लदे वाहन जब इन गड्ढों और दलदल से गुजरते हैं, तो उनके स्प्रिंग और कमानी टूटने का खतरा बना रहता है। इससे किसानों और वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

शौचालय नहीं, खुले में जाने को मजबूर किसान

मंडी जैसी सार्वजनिक और व्यस्त जगह पर किसानों के लिए शौचालय की भी कोई व्यवस्था नहीं है। दूर-दराज के गांवों से तड़के आने वाले किसानों को बारिश के मौसम में लघुशंका और शौच के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इससे परिसर में गंदगी फैलने और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

किसानों ने की तत्काल व्यवस्था की मांग

क्षेत्र के किसान यादवराव पवार, मंडी अध्यक्ष दिलीप साहू तथा अन्य स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि मंडी परिसर में तत्काल मुरुम डलवाकर दलदल खत्म किया जाए, पाइपलाइन के लिए खोदे गए गड्ढों को भरा जाए तथा पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराई जाएं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

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