अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक ईदगाह पर मामला उस समय गरम हो गया जब वक्फ बोर्ड द्वारा ईदगाह की पार्किंग की जमीन पर टेलीकॉम कंपनी एयरटेल को टावर लगाने के लिए टेंडर जारी किए जाने की जानकारी सामने आई।इस फैसले के विरोध में एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष मोहसिन अली खान मौके पर पहुंच कर खुदाई का काम तत्काल रुकवा दिया। इस दौरान उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी कि जब तक जेसीबी मशीन को मौके से हटाकर काम पूरी तरह बंद नहीं किया जाता, तब तक वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने काम जारी रखने की कोशिश की, लेकिन मोहसिन अली खान अपने रुख पर अड़े रहे। उनके सख्त विरोध के बाद खुदाई कर रही जेसीबी मशीन को मौके से हटाना पड़ा और काम अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद पुलिस ने काम जारी रखने की कोशिश की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई और AIMIM के कार्यकर्ताओं व पुलिस के बीच तीखी नोक झोंक भी हुई।

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस के रवैये पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यहां पुलिस की कार्यप्रणाली संतोषजनक नजर नहीं आई। मौके पर जिस तरह का व्यवहार पुलिस ने प्रदर्शित किया वह कहीं भी न्यायसंगत प्रतीत नहीं हुआ। सहायक पुलिस आयुक्त सहित अन्य द्वारा मोहसिन अली खान व अन्य के साथ किया गया व्यवहार सत्ताधारी आकाओं की चाटुकारिता का खुला प्रमाण था। सहायक पुलिस आयुक्त सहित अन्य अधिकारियों के व्यवहार को लेकर भी लोगों द्वारा नाराजगी जताई जा रही।

वहीं आल इंडिया जमीयत इत्तेहादुल मुस्लेमीन के अध्यक्ष डॉ. सैय्यद खालिद कैस ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक ईदगाह की जमीन पर टावर लगाने की अनुमति देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह वक्फ संपत्तियों के संरक्षण में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कि राजधानी के तमाम मुस्लिम लीडर चाहे सत्ताधारी दल के हों या विपक्ष के सभी बिलों में घुसे हुए दिखाई दिए।किसी की भी तरफ से इस मुद्दे पर विरोध के स्वर नजर नहीं आए। ऐसे में मोहसिन अली खान द्वारा विरोध दर्ज कराना प्रशंसनीय है।
फिलहाल यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक और सामाजिक असर देखने को मिल सकते हैं। स्थानीय लोगों और संगठनों द्वारा इस फैसले को वापस लेने की मांग तेज हो रही है।

