मक़सूद अली, ब्यूरो चीफ, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

पवित्र रमजान महीने के समापन के साथ देश और दुनिया भर में ईद का त्योहार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। यह महीना आत्मसंयम, आस्था और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं।
रोज़ा रखना आसान नहीं होता। पूरे दिन बिना खाए-पीए रहना शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, जिसे कई बार बड़े-बुजुर्ग भी कठिन मानते हैं।
इसी बीच यवतमाल के एक छोटे से बच्चे जर्जिस जोहर ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से सबको प्रभावित किया है। 13 अप्रैल 2017 को जन्मे जर्जिस, जो तीसरी कक्षा के छात्र हैं, ने इस वर्ष संकल्प लेकर पूरे रमजान में 30 रोज़े रखे और अपना लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया।
धार्मिक माहौल में पले-बढ़े जर्जिस पर उनके माता-पिता की दिनचर्या का गहरा प्रभाव पड़ा। उनके माता-पिता नियमित रूप से रोज़े रखते हैं, जिससे प्रेरित होकर जर्जिस ने भी यह कठिन संकल्प लिया।
कम उम्र में ऐसा अनुशासन और समर्पण दिखाकर जर्जिस ने समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। उनकी लगन और मेहनत की हर ओर सराहना हो रही है।
यह कहानी न केवल बच्चों बल्कि बड़ों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है, जो यह संदेश देती है कि दृढ़ निश्चय और विश्वास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

