निहाल चौधरी, इटवा/सिद्धार्थ नगर (यूपी), NIT:
भदोखर गांव में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह बदहाल नजर आ रही है। गांव में प्रवेश करते ही गंदगी का आलम साफ दिखाई देता है, जहां टूटी-फूटी और बजबजाती नालियां स्वच्छता के दावों की पोल खोल रही हैं। चारों ओर फैली गंदगी यह साबित कर रही है कि यहां सफाई केवल नारों और कागजी योजनाओं तक सीमित रह गई है।
“गांव को स्वच्छ बनाना है” जैसे दावे जमीनी हकीकत से बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। कीचड़ और गंदगी के कारण लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। सड़कों पर जमा गंदा पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
इतना ही नहीं, लाखों रुपये की लागत से बना RRC सेंटर भी बेकार पड़ा हुआ है। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते कूड़ा प्रबंधन पूरी तरह बाधित है और यह केंद्र सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है।
सरकार की मंशा गांवों को गंदगी और बीमारियों से मुक्त करने की है, लेकिन भदोखर में हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो ये योजनाएं और संसाधन अपना महत्व खो बैठेंगे।

