जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

गोमांस तस्करी के संवेदनशील मामले में आरोपी असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को जमानत मिलने के तुरंत बाद पुलिस ने दोबारा गिरफ्तार कर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA/रासुका) के तहत निरुद्ध कर दिया। पुलिस का कहना है कि उसकी रिहाई से शहर में सामुदायिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो सकता था।
19-20 मार्च 2026 को भोपाल सेशन कोर्ट ने करीब 26 टन कथित गोमांस तस्करी मामले में असलम को 35,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दी थी। आरोपी लगभग 70 दिनों से जेल में बंद था।
जेल से रिहा होते ही पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। परिजनों के अनुसार, उन्हें मिलने का मौका भी नहीं दिया गया। बाद में उसे गांधीनगर थाने ले जाया गया, जहां रात में ही उस पर रासुका की कार्रवाई कर दी गई। अब उसे पुनः जेल भेज दिया गया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह मामला अत्यंत संवेदनशील था। गोकशी और गोमांस तस्करी के आरोपों को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल सहित कई संगठनों ने जमानत का विरोध किया था। प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी भी दी गई थी।
बताया जा रहा है कि जेल के बाहर आरोपी के समर्थकों द्वारा नारेबाजी की गई, जिससे सामुदायिक तनाव बढ़ने की आशंका बनी। पुलिस ने इसे सार्वजनिक व्यवस्था के लिए संभावित खतरा मानते हुए एहतियाती कदम उठाया।
असलम का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। वह नगर निगम के स्लॉटर हाउस से जुड़ा बताया जाता है और उस पर फर्जी दस्तावेज व अन्य गतिविधियों के आरोप भी लगते रहे हैं। पुलिस का मानना है कि रिहाई के बाद उसके फरार होने या हालात बिगाड़ने की आशंका थी।
इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर पहले से योजना बनाकर रासुका के तहत कार्रवाई की गई। यह कानून ऐसे मामलों में लागू किया जाता है, जहां किसी व्यक्ति की गतिविधियां भविष्य में कानून-व्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं।
फिलहाल, आरोपी को रासुका के तहत अधिकतम एक वर्ष तक निरुद्ध रखा जा सकता है, हालांकि मामले की समीक्षा एडवाइजरी बोर्ड द्वारा की जाएगी।

