जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:
भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची की शुद्धता पर उठा विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात कर हजारों फर्जी नामों के प्रमाण सौंपे हैं। इनमें एक ही पते पर दर्जनों नाम (कभी 37, तो कभी 43 तक) शामिल पाए गए, जो स्पष्ट रूप से फर्जीवाड़े की ओर इशारा करते हैं।
दिग्विजय सिंह ने ज्ञापन में कहा कि निर्वाचन आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बावजूद यह गड़बड़ी 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का कारण बनी। उन्होंने मंत्री विश्वास सारंग और चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि आगामी चुनाव निष्पक्ष हो सकें।
यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में गरमा रहा है, और निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार है।भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में फर्जी नामों के प्रमाण मुख्य रूप से कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला द्वारा जमीनी जांच और सर्वे से सामने आए हैं। ये प्रमाण मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन और मीडिया रिपोर्ट्स में विस्तार से दिए गए हैं।
यहां प्रमुख बिंदु और उदाहरण हैं:
मुख्य प्रमाण और उदाहरण
एक ही पते पर दर्जनों नाम: अंतिम मतदाता सूची (21 फरवरी 2026 को जारी) में कई मकानों पर असामान्य रूप से अधिक मतदाता दर्ज पाए गए, जबकि वास्तविक निवासी बहुत कम हैं।
करौंद इलाके में एक मकान पर 37 से 43 तक नाम दर्ज मिले (कुछ रिपोर्ट्स में 43 नाम स्पष्ट उल्लेख)।
600-1500 वर्ग फीट के छोटे मकानों में 36 से 43 मतदाता सूचीबद्ध।
एक मामले में 6 कमरों वाले मकान पर 40 मतदाता दर्ज।
सबसे चरम उदाहरण: एक पते पर 108 मतदाता दर्ज, लेकिन फील्ड वेरिफिकेशन में केवल 4 लोग मिले।
विशिष्ट मकान मालिकों के उदाहरण (रतन कॉलोनी, करोंद, भोपाल):
पोखनलाल साहू (मकान नंबर 2)
कमलेंद्र कुमार गुप्ता (मकान नंबर 10)
हमीर सिंह यादव (मकान नंबर 21)
इन मकान मालिकों ने शपथपत्र देकर बताया कि दर्ज नाम वाले लोग उनके घर में न तो रहते हैं और न ही उन्हें पहचानते हैं।
कुल फर्जी नामों का अनुमान:
मनोज शुक्ला ने दावा किया कि नरेला में हजारों (कुछ रिपोर्ट्स में 12,000-15,000 तक) फर्जी मतदाता सूची में शामिल हैं।
BL-2 जांच में पाया गया कि 25% वोटर अपने दर्ज पते पर नहीं मिले, जो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी दर्शाता है।
कैसे सामने आए प्रमाण?
मनोज शुक्ला ने जमीनी स्तर पर घर-घर सर्वे और मकान मालिकों से बातचीत की।
मकान मालिकों के शपथपत्र और मतदाता सूची की प्रति प्रमाण के रूप में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपे गए।
दिग्विजय सिंह ने 9 मार्च 2026 को इन प्रमाणों के साथ मुलाकात की और निष्पक्ष जांच की मांग की।
ये गड़बड़ियां स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बाद भी बनी रहीं, जहां BLO को 100% भौतिक सत्यापन करना था।
यह मुद्दा 2023 चुनाव में कांग्रेस की हार से भी जोड़ा जा रहा है, और कांग्रेस ने मंत्री विश्वास सारंग व चुनाव आयोग पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। चुनाव आयोग से जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
यदि आपके पास कोई विशिष्ट मकान नंबर, बूथ या अतिरिक्त प्रमाण (जैसे स्क्रीनशॉट/दस्तावेज) हैं, तो साझा करें—हम और गहराई से देख सकते हैं। भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र में फर्जी मतदाताओं के प्रमुख प्रमाण मुख्य रूप से रतन कॉलोनी, करौंद इलाके के विशिष्ट मकानों से जुड़े हैं। ये प्रमाण कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला की जमीनी जांच, मकान मालिकों के शपथपत्र और दिग्विजय सिंह द्वारा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपे गए दस्तावेजों पर आधारित हैं।
यहां विस्तृत विश्लेषण है (21 फरवरी 2026 की अंतिम मतदाता सूची के आधार पर):
प्रमुख विशिष्ट मकान और उनका विश्लेषण
मकान नंबर 2 (पोखनलाल साहू, रतन कॉलोनी, करौंद, वार्ड 75, बूथ 63):
दर्ज मतदाता: 37 नाम।
वास्तविक स्थिति: मकान का आकार लगभग 1500 वर्ग फीट। मकान मालिक के परिवार में केवल 6 पात्र मतदाता।
प्रमाण: मकान मालिक पोखनलाल साहू ने शपथपत्र दिया कि बाकी नाम वाले लोग यहां नहीं रहते और न ही उन्हें पता है।
विश्लेषण: एक छोटे-मध्यम आकार के घर में 37 नाम असामान्य है, जो स्पष्ट फर्जीवाड़े का संकेत देता है।
मकान नंबर 10 (कमलेंद्र कुमार गुप्ता, रतन कॉलोनी, करौंद, वार्ड 63):
दर्ज मतदाता: 36 नाम।
वास्तविक स्थिति: मकान का आकार केवल 800 वर्ग फीट। परिवार में 8 पात्र मतदाता।
प्रमाण: मकान मालिक कमलेंद्र कुमार गुप्ता का शपथपत्र कि दर्ज अतिरिक्त नाम फर्जी हैं और लोग यहां नहीं रहते।
विश्लेषण: इतने छोटे घर में इतने नाम असंभव हैं; जांच में कई नाम अलग-अलग जातियों/समुदायों के बताए गए, जो संदेह बढ़ाता है।
मकान नंबर 21 (हमीर सिंह यादव, रतन कॉलोनी, करौंद):
दर्ज मतदाता: 43 नाम (कुछ रिपोर्ट्स में 37-43 का रेंज)।
वास्तविक स्थिति: मकान का आकार 600 वर्ग फीट। परिवार में केवल 4 पात्र मतदाता।
प्रमाण: मकान मालिक हमीर सिंह यादव का शपथपत्र। मौके पर जांच में केवल 4 लोग मिले।
विश्लेषण: सबसे चरम उदाहरण; छोटे घर में 43 नाम SIR प्रक्रिया की विफलता दर्शाता है।
अन्य उल्लेखनीय विशिष्ट मामला
मकान नंबर 70 (बूथ 189, मध्य प्रदेश शिक्षक संघ का कार्यालय, जो RSS ऑफिस के रूप में जाना जाता है):
दर्ज मतदाता: 30 नाम (कुछ रिपोर्ट्स में 108 तक का दावा, लेकिन मुख्य रूप से 30)।
वास्तविक स्थिति: यहां केवल 1 व्यक्ति (संघ का प्रशिक्षक) रहता है।
प्रमाण: दिग्विजय सिंह ने खुद मौके पर जांच की, BLO/सुपरवाइजर से बात की। 29 फर्जी नाम जोड़े गए पाए गए।
विश्लेषण: यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि जगह RSS से जुड़ी बताई गई। दिग्विजय सिंह ने इसे SIR प्रक्रिया की संपूर्ण फर्जीवाड़े का प्रमाण बताया।
समग्र विश्लेषण: ये मकान मुख्य रूप से रतन कॉलोनी, करौंद में हैं, जहां छोटे-छोटे घरों (600-1500 sq ft) में 36-43 नाम दर्ज हैं, जबकि वास्तविक निवासी 4-8 तक।
मकान मालिकों के शपथपत्र मुख्य प्रमाण हैं, जो दर्शाते हैं कि नाम वाले लोग यहां नहीं रहते।
कुल अनुमान: नरेला में हजारों (कुछ दावों में 40,000 तक) फर्जी नाम, जहां BL-2 जांच में 25% वोटर पते पर नहीं मिले।
ये गड़बड़ियां SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के बाद भी बनी रहीं, जहां 100% भौतिक सत्यापन का दावा था।
यह मुद्दा अभी भी गरमा रहा है, और चुनाव आयोग से जांच की मांग जारी है।

