मक़सूद अली, ब्यूरो चीफ, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

नई परवाज़ मूवमेंट (विदर्भ) के संस्थापक अध्यक्ष एवं कांग्रेस कार्यकर्ता मोहम्मद आसिम अली ने यवतमाल, वर्धा और चंद्रपुर विधान परिषद चुनाव से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की अपील की है।
अपने पत्र में आसिम अली ने कहा कि यवतमाल विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार साहेबराव कामरे द्वारा नामांकन वापस लेने की घटना से पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने इसे केवल एक उम्मीदवार का मामला न बताते हुए पार्टी की निर्णय प्रक्रिया और उम्मीदवार चयन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि केवल उम्मीदवार पर कार्रवाई कर जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी जानी चाहिए, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि उन्हें टिकट किसने दिलवाया, उनकी सिफारिश किसने की और उनका नाम पार्टी नेतृत्व तक किन माध्यमों से पहुंचा। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल नेताओं और पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जानी चाहिए।
आसिम अली ने मांग की कि महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी उन सभी व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक करे, जिनकी सिफारिश पर उम्मीदवार को टिकट दिया गया। साथ ही जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी संगठनात्मक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब राहुल गांधी देशभर में संविधान, सामाजिक न्याय, बेरोजगारी, किसानों और युवाओं के मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाना चिंताजनक है। इस पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
आसिम अली ने यह भी कहा कि पार्टी के कई कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा हुआ है और लंबे समय से संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं को निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा है। उन्होंने संगठन में पारदर्शिता, जवाबदेही और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उन्होंने यवतमाल जिले के कांग्रेस समर्थकों, युवाओं, महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत बनाने और कार्यकर्ताओं के सम्मान की रक्षा के लिए है।
अंत में उन्होंने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से वरिष्ठ नेताओं की एक स्वतंत्र जांच समिति गठित कर मामले की गहन जांच कराने, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और कार्यकर्ताओं का विश्वास बहाल करने की मांग की।

