भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल ट्रायल रन: हरियाणा में 70 किमी/घंटा की रफ्तार से ग्रीन रेल यात्रा की शुरुआत | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने मंगलवार को हरियाणा में सफल ट्रायल रन कर ग्रीन रेल यात्रा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। ट्रेन ने सुबह 8:30 बजे जींद रेलवे स्टेशन से अपनी यात्रा शुरू की और ललित खेड़ा की ओर बढ़ी, फिर यू-टर्न लेकर वापस लौटी।

आठ कोच वाली इस हाइड्रोजन ट्रेन ने रेलवे ट्रैक पर अधिकतम 70 किमी/घंटा की रफ्तार हासिल की। ट्रायल के दौरान कुल 20 किलोमीटर की दूरी तय की गई। यह परीक्षण अगले सप्ताह तक जारी रहेगा।

यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के लिए पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, क्योंकि हाइड्रोजन ट्रेन शून्य उत्सर्जन (Zero Emission) प्रदान करती है।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक क्या है?

हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक एक इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया है, जो हाइड्रोजन (H₂) और ऑक्सीजन (O₂) की रासायनिक ऊर्जा को सीधे बिजली (Electricity) में परिवर्तित करती है। इसमें दहन (Combustion) नहीं होता, इसलिए यह अत्यंत स्वच्छ तकनीक मानी जाती है। इसका मुख्य उप-उत्पाद केवल पानी (H₂O) और थोड़ी मात्रा में गर्मी होती है। इसमें कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) या अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं होता।

यह बैटरी की तरह कार्य करती है, लेकिन अंतर यह है कि बैटरी को रिचार्ज करना पड़ता है, जबकि फ्यूल सेल तब तक बिजली बनाती रहती है, जब तक हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की आपूर्ति होती रहती है।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल कैसे काम करती है? (Step-by-Step)

एक सामान्य PEM (Proton Exchange Membrane) फ्यूल सेल में चार मुख्य भाग होते हैं:

एनोड (Anode) – नकारात्मक इलेक्ट्रोड

कैथोड (Cathode) – सकारात्मक इलेक्ट्रोड

इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन – विशेष झिल्ली

कैटेलिस्ट – आमतौर पर प्लैटिनम (Platinum)

कार्यप्रणाली:

1. हाइड्रोजन गैस (H₂) एनोड पर प्रवाहित की जाती है।

2. कैटेलिस्ट की सहायता से हाइड्रोजन अणु प्रोटॉन (H⁺) और इलेक्ट्रॉन (e⁻) में विभाजित हो जाते हैं।
रिएक्शन: 2H₂ → 4H⁺ + 4e⁻

3. इलेक्ट्रॉन मेम्ब्रेन से नहीं गुजर सकते, इसलिए वे बाहरी सर्किट से होकर कैथोड की ओर प्रवाहित होते हैं। इलेक्ट्रॉनों का यह प्रवाह ही विद्युत धारा (Electric Current) उत्पन्न करता है।

4. प्रोटॉन (H⁺) मेम्ब्रेन से होकर कैथोड तक पहुँचते हैं।

5. कैथोड पर ऑक्सीजन (O₂), प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन मिलकर पानी (H₂O) बनाते हैं।
रिएक्शन: O₂ + 4H⁺ + 4e⁻ → 2H₂O

कुल रासायनिक अभिक्रिया:
2H₂ + O₂ → 2H₂O + बिजली + ऊष्मा

मुख्य विशेषताएँ

शून्य उत्सर्जन – केवल पानी निकलता है

उच्च दक्षता (40–60%)

कम ध्वनि प्रदूषण

तेज रिफ्यूलिंग

उपयोग: ट्रेन, बस, कार, ट्रक और पावर जनरेशन

चुनौतियाँ

ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन अभी महंगा है

स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट की तकनीकी चुनौतियाँ

इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी

प्लैटिनम जैसे महंगे कैटेलिस्ट की लागत

भारत में शुरू हुई यह हाइड्रोजन ट्रेन इसी तकनीक पर आधारित है। ट्रेन की छत पर हाइड्रोजन टैंक और फ्यूल सेल स्टैक लगाए गए हैं, जो बिजली उत्पन्न कर इलेक्ट्रिक मोटर को चलाते हैं।

यह तकनीक ग्रीन एनर्जी और नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में भारत का एक मजबूत कदम है।

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