पठा जलाशय परियोजना में देरी पर किसानों का उग्र प्रदर्शन, 10 घंटे चक्काजाम के बाद प्रशासन के आश्वासन पर खत्म हुआ आंदोलन | New India Times

राकेश यादव, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

पठा जलाशय परियोजना में देरी पर किसानों का उग्र प्रदर्शन, 10 घंटे चक्काजाम के बाद प्रशासन के आश्वासन पर खत्म हुआ आंदोलन | New India Times

केसली तहसील अंतर्गत लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन पठा जलाशय परियोजना का कार्य चार वर्ष बाद भी पूरा नहीं होने से नाराज सैकड़ों किसानों ने सोमवार को टडा-सिलवानी मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। यह सागर जिले के हाल के सबसे बड़े किसान आंदोलनों में से एक रहा, जो करीब 10 घंटे तक चला। चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा।

पठा जलाशय परियोजना में देरी पर किसानों का उग्र प्रदर्शन, 10 घंटे चक्काजाम के बाद प्रशासन के आश्वासन पर खत्म हुआ आंदोलन | New India Times

किसान नेता अर्पित यादव ने बताया कि वर्ष 2022 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने परियोजना का भूमिपूजन करते हुए 18 माह में कार्य पूरा कराने का आश्वासन दिया था। किसानों का आरोप है कि मुख्य ठेकेदार ने निर्माण कार्य पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर सौंप दिया, जिसके कारण लापरवाही बरती गई और नाला क्लोजिंग सहित कई महत्वपूर्ण कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार कलेक्टर एवं एसडीएम कार्यालय में आवेदन देकर नाला क्लोजिंग का कार्य शीघ्र शुरू कराने की मांग कर चुके हैं। किसानों ने पूर्व में चेतावनी दी थी कि यदि दो दिनों के भीतर कार्य प्रारंभ नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर सोमवार सुबह से ग्रामीण सड़क पर उतर आए और चक्काजाम शुरू कर दिया।

आंदोलन की सूचना मिलते ही टडा और केसली थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। बाद में प्रशासनिक अधिकारी भी किसानों से चर्चा करने पहुंचे। लंबे समय तक चली बातचीत के बाद एसडीएम द्वारा निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराने का आश्वासन दिए जाने पर किसानों ने आंदोलन समाप्त कर दिया। प्रशासन ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि निर्माण कार्य जल्द प्रारंभ कराया जाएगा। साथ ही बताया गया कि बारिश शुरू होने पर तकनीकी कारणों से कार्य को अस्थायी रूप से रोकना पड़ सकता है।

इस मामले में पूर्व मंत्री Harsh Yadav ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समय पर परियोजना पूरी न होने से किसानों और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

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