रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी आदिवासी बाहुल्य झाबुआ जिले के प्रसिद्ध भगोरिया हाट में उत्साह अपने पूरे शबाब पर नजर आया। चारों ओर भगोरिया मेले की धूम रही और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में मेहमान यहां पहुंचे।

पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-मांदल और थाली की खनखनाहट के बीच लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। मेले में राजनीतिक दलों ने भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। कांग्रेस और भाजपा ने विशाल गैर-रैलियां निकालकर जनसमर्थन का प्रदर्शन किया।

प्रशासन रहा मुस्तैद
भगोरिया हाट में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। भगोरिया हाट केवल मेला नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, प्रेम और परंपरा का प्रतीक है। हालांकि, कांग्रेस और भाजपा की सक्रिय भागीदारी से मेले में राजनीतिक रंग भी देखने को मिला।

मांदल की थाप पर थिरका युवा वर्ग
मांदल की थाप पर युवक-युवतियां जमकर थिरकते नजर आए। मेले में झूले, चकरी, पारंपरिक आभूषण, रंग-बिरंगी पिचकारियां, पान, पाउच, कुल्फी, आइसक्रीम और पेप्सी की दुकानों पर दिनभर भीड़ उमड़ी रही। युवाओं ने पारंपरिक अंदाज में एक-दूसरे को गुलाल-अबीर लगाकर होली पर्व की बधाई और शुभकामनाएं दीं।

राजनीतिक हस्तियों ने भी की शिरकत
भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भी मेले में पहुंचकर भगोरिया का लुत्फ उठाया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी झाबुआ पहुंचे और ढोल-मांदल की थाप पर जमकर थिरकते नजर आए।
मेले में अन्य राज्यों और जिलों से भी मेहमान पहुंचे। मेघनगर के वरिष्ठ पत्रकार हरिराम गिरधाणी के मित्रों की टीम भी बड़नगर से भगोरिया मेले का आनंद लेने पहुंची। चारों ओर ढोल-मांदल और पीपीडी बाजों की गूंज देर शाम तक सुनाई देती रही। युवक-युवतियों की टोलियां देर रात तक उत्साहपूर्वक अपने गंतव्य की ओर रवाना होती रहीं।

