पुलिस खाँस दे तो खाँसी, आम आदमी खाँसे तो कोरोना, इटवा में दोहरे नियमों पर सवाल? | New India Times

निहाल चौधरी, इटवा/सिद्धार्थ नगर (यूपी), NIT:

इटवा कस्बे में यातायात नियमों के पालन को लेकर पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कानून का सख्त पालन केवल गरीब बाइक सवारों से करवाया जाता है, जबकि कई पुलिस व सरकारी वाहनों में ही नियमों का उल्लंघन होता दिखाई देता है।

कस्बे में पुलिस प्रशासन की कुछ गाड़ियाँ बिना PUC और बिना इंश्योरेंस सड़कों पर चलती देखी गईं। जबकि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अनुसार—

• धारा 146: बिना बीमा वाहन चलाना अपराध है।

• धारा 190(2): बिना PUC वाहन चलाने पर दंड का प्रावधान है।

इन नियमों का पालन निजी, सरकारी और पुलिस—सभी वाहनों पर समान रूप से अनिवार्य है।

गरीब बाइक सवार निशाने पर?

स्थानीय लोगों का कहना है कि थोड़ी-सी गलती पर तुरंत चालान काट दिया जाता है, लेकिन इटवा चौराहे पर गलत तरीके से खड़ी पुलिस गाड़ियों पर कार्रवाई नहीं होती। लोगों का आरोप है कि चालान की कार्रवाई अक्सर बढ़नी रोड तक ही सीमित रहती है।

“इन पर भी कड़ी कार्रवाई हो”

कस्बावासियों ने सवाल उठाया कि—
बिना नंबर प्लेट के वाहन, काली फिल्म लगे वाहन, बिना अनुमति हूटर, ओवरलोड टेंपो-ट्रक और कुछ सरकारी वाहनों पर अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

रखवाले ही अगर कानून तोड़ें…

लोगों का कहना है कि या तो पुलिसकर्मी कार्रवाई से बचते हैं, या फिर सबसे आसान रास्ता कमजोर वर्ग को परेशान करना बन गया है। कुछ लोगों ने ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई न होने के पीछे लेन-देन की आशंका भी जताई।

समान कानून, समान कार्रवाई की मांग

इटवा के नागरिकों का कहना है कि—
“अगर पुलिस RTO की भूमिका निभा रही है, तो नियम सब पर समान रूप से लागू करे।” लोगों की मांग है कि पुलिस पहले अपने वाहनों को नियमों के अनुरूप करे, तभी कानून पर जनता का भरोसा मजबूत रहेगा।

By nit

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