विशाखापट्टनम में पेसा महोत्सव, पातालकोट की टीम ने परंपराओं और संस्कृति को दिया नया मंच | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

विशाखापट्टनम में पेसा महोत्सव, पातालकोट की टीम ने परंपराओं और संस्कृति को दिया नया मंच | New India Times

पेसा महोत्सव 23 और 24 दिसंबर 2025 को आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम में आयोजित किया गया, जहाँ जनजातीय समुदाय का राष्ट्रीय पर्व उत्साहपूर्वक मनाया गया। भारत सरकार के पंचायतराज मंत्रालय, नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के 10 आदिवासी बहुल राज्यों के पेसा क्षेत्रों की विभिन्न जनजातियों को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया गया।

इसी क्रम में, 24 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय पेसा दिवस धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल के मार्गदर्शन में, तथा पंचायतराज संचालनालय भोपाल के संचालक (IAS) छोटे सिंह के निर्देशन में पेसा महोत्सव का सफल आयोजन हुआ।

मध्यप्रदेश के 20 आदिवासी बहुल क्षेत्रों से चयनित 9 जिले — अलीराजपुर, झाबुआ, धार, बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट, अनूपपुर, उमरिया और डिंडोरी — से सांस्कृतिक दल, हस्तशिल्प कलाकार, स्थानीय व्यंजन प्रदर्शक, खिलाड़ी और सरपंच प्रतिनिधियों सहित कुल 152 सदस्य शामिल हुए। राज्य की ओर से प्रतिनिधित्व पेसा नोडल राजेश यादव और कुंवर वकार नसीम ने किया।

पेसा जिला समन्वयक कमलेश टेकाम के नेतृत्व में 18 प्रतिभागी शामिल हुए। पातालकोट की पेसा टीम द्वारा पारंपरिक आदिवासी व्यंजन — मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, रागी से बने व्यंजन, तथा महुआ, तिल और गुड़ से बने लड्डू, चक्की और बिस्किट — प्रदर्शित किए गए, जिनका आगंतुकों ने भरपूर आनंद लिया।

पंचायत प्रतिनिधि श्रीमती शारदा उइके और श्रीमती संगीता धुर्वे ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने विशाखापट्टनम की विभिन्न ग्राम पंचायतों का भ्रमण किया और अपने क्षेत्रों में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और सफलताओं को राष्ट्रीय मंच पर साझा किया।

इनमें ग्राम सभा की शक्तियाँ, शांति एवं सुरक्षा समिति का कार्य, भूमि प्रबंधन, जल संसाधन, खनिज संपदा, मादक पदार्थों पर नियंत्रण, गौण वन उपज, हाट-बाजार प्रबंधन और साहूकारी जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध किए गए प्रयास शामिल रहे।

महोत्सव में जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और स्वावलंबन को बढ़ावा देने का सशक्त संदेश दिया गया।

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