अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) द्वारा 16 दिसंबर को निर्भया हत्याकांड की स्मृति में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास से बालसन चौराहा स्थित गांधी प्रतिमा तक कैंडल मार्च निकाला गया। वर्ष 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप कांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन इसके बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी नहीं आई है।

आइसा ने पश्चिम बंगाल में आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज प्रकरण से लेकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में हुए कथित दुष्कर्म मामलों सहित देशभर में बढ़ते महिला उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की। इसके साथ ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय के महिला छात्रावासों में लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की भी मांग उठाई गई।
कार्यक्रम के दौरान आरोप लगाया गया कि महिला छात्रावासों की दो-तीन वार्डन छात्रावास के मुख्य द्वार पर पहुँचकर छात्राओं को एकत्र होने से रोकने का प्रयास करती रहीं और उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने से वंचित किया गया, जिसकी आइसा ने कड़ी निंदा की।
मार्च की शुरुआत महिला छात्रावास परिसर में एक संक्षिप्त सभा से हुई, जिसमें छात्र-छात्राओं ने कविताएं और गीत प्रस्तुत किए। इस अवसर पर आइसा प्रदेश अध्यक्ष कॉमरेड मनीष कुमार ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा मर्दवाद और पितृसत्ता को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके कारण देश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधों पर रोक लगाने के बजाय अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन आइसा इलाहाबाद विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष कॉमरेड सोनाली ने किया। उन्होंने कहा कि देश में फासीवादी प्रवृत्तियों का प्रभाव बढ़ रहा है और इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव महिलाओं पर पड़ रहा है। इस दौरान कॉमरेड महुआ और कॉमरेड साक्षी ने गीत प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में पूजा, जैनब, आकांक्षा, अनन्या, आशीष, अविराम, श्वेतांक सहित कई छात्र-छात्राओं ने कविताएं पढ़ीं। इस अवसर पर भानु, विवेक, शशि भूषण, सुधीर, अमित, मानवेन्द्र, सुजीत, गोविंद, प्रदीप्त, रितेश, अभिनव, कुलदीप, रूपम, प्रतिमा, शिवानी, बंदना, शिल्पी, शुभम, पूजा साहनी, शिवांगी, विकास, अनुज, केतन, आर्यन सहित बड़ी संख्या में छात्र, छात्राएं एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

