मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के नए नियमों पर सवाल: एपीएल परिवारों को बाहर करने और सीमित लक्ष्य पर पुनर्विचार की मांग | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

राज्य शासन द्वारा संचालित “मुख्यमंत्री कन्या विवाह / निकाह योजना” का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की कन्याओं के विवाह में सहयोग प्रदान करना है, जिससे समाज के वंचित वर्ग को राहत मिल सके। यह योजना सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हाल ही में इस योजना में किए गए नवीन प्रावधानों के अनुसार अब केवल गरीबी रेखा (बीपीएल) के अंतर्गत जीवन-यापन करने वाले परिवारों को ही इस योजना का लाभ प्रदान किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके कारण एपीएल श्रेणी के परिवार इससे वंचित हो गए हैं। व्यवहारिक रूप से देखा जाए तो समाज में अनेक ऐसे परिवार हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद बीपीएल सूची में दर्ज नहीं हैं। ऐसी स्थिति में उन परिवारों की कन्याओं का इस योजना के लाभ से वंचित रह जाना निश्चित है, जो कि सामाजिक दृष्टि से न्यायोचित प्रतीत नहीं होता।

इसके साथ ही, विभिन्न जिलों के लिए निर्धारित विवाह जोड़ों की संख्या भी अत्यंत सीमित कर दी गई है। उदाहरण स्वरूप, छिंदवाड़ा जिले के लिए कुल 800 जोड़ों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि छिंदवाड़ा विधानसभा एवं मोहखेड़ विकासखंड को मिलाकर मात्र 200 जोड़ों का लक्ष्य रखा गया है, जो लगभग साढ़े चार लाख की आबादी वाले क्षेत्र के लिए अत्यंत कम है। इस प्रकार की सीमा निर्धारण से योजना का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित हो रहा है और अनेक इच्छुक एवं पात्र जोड़े इससे लाभान्वित नहीं हो पा रहे हैं।

यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019-20 में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में किसी प्रकार की जटिल शर्तें लागू नहीं थीं, जिसके परिणामस्वरूप सभी वर्गों, जातियों एवं समुदायों के हजारों जोड़ों ने एक साथ विवाह कर सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया था। छिंदवाड़ा जिले में ही उस समय 3353 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न हुआ, जो एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया।

अतः आपसे अनुरोध है कि मानवीय मूल्यों को दृष्टिगत रखते हुए “मुख्यमंत्री कन्या विवाह / निकाह योजना” के वर्तमान जटिल प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए तथा इसे पूर्व की भांति अधिक समावेशी एवं सरल बनाया जाए, जिससे एपीएल एवं बीपीएल दोनों वर्गों के पात्र वर-वधु इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। साथ ही, वैवाहिक जोड़ों की निर्धारित संख्या समाप्त करते हुए अथवा उसे यथोचित रूप से बढ़ाकर अधिक से अधिक हितग्राहियों को इसमें सम्मिलित होने का अवसर प्रदान किया जाए तथा 200 जोड़ों के लक्ष्य को समाप्त करने के संबंध में आवश्यक आदेश जारी किए जाएं।

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