मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशों पर पुलिस अधीक्षक बुरहानपुर श्री देवेंद्र पाटीदार के निर्देशन और मार्गदर्शन में 05 दिसंबर 2025 को रेणुका पुलिस लाईन बुरहानपुर में सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। कार्यक्रम में नेचरोपेथिक्स प्रशिक्षक दल द्वारा पुलिस फोर्स को सीपीआर देने के उचित तरीके के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया।
प्राय: देखा गया है कि किसी भी घटना/दुर्घटना में या अचानक से बेहोश होने वाले व्यक्तियों को प्राथमिक उपचार के रूप में सीपीआर (Cardio Pulmonary Resuscitation) दिये जाने से संबंधित व्यक्ति की जान बच सकी है । इस प्रकार की कुछ घटनाऐं ऐसी भी देखी गईं, जहां पुलिसकर्मियों द्वारा मौके पर सीपीआर देने से पीड़ित की जान बची है और समाज में पुलिस की इस कार्यवाही की काफी सराहना भी हुई है । सीपीआर एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रारंभिक उपचार प्रक्रिया है, जो कोई भी घटना/दुर्घटना में बेहोश अथवा अचानक से सांस रूक जाने वाले व्यक्ति को राहत पहुंचाने अथवा उसका जीवन बचाने में काफी मददगार सिद्ध हो सकता है।
चूंकि कोई भी घटना/दुर्घटना की सूचना पर घटना स्थल पर पुलिस फोर्स के अधिकारी/कर्मचारी भी First responders होते हैं । जिससे सीपीआर जैसी महत्वपूर्ण प्रारंभिक उपचार प्रक्रिया का उन्हें प्रशिक्षण होना आवश्यक है, क्योंकि कभी-कभी ऐसी घटना भी होती हैं, जहां प्राथमिक तौर पर सीपीआर मिलने से पीड़ित की जान बच सकती है ।
इस तारतम्य पुलिस अधीक्षक श्री देवेंद्र पाटीदार के निर्देशन में दिनांक 05.12.2025 को नगर पुलिस अधीक्षक श्री गौरव पाटिल के मार्गदर्शन एवं रक्षित निरीक्षक श्री सुनील के नेतृत्व में सीपीआर (CPR-Cardiopulmonary resuscitation) विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान नेचरोपेथिक्स प्रशिक्षक आशीष जी द्वारा सीपीआर अथवा कृत्रिम स्वसन, हार्ट अटैक के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि आकस्मिक परिस्थितियों में मरीज़ या घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए सीपीआर एक बहुत महत्वपूर्ण तरीका है। कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) एक आपातकालीन प्रक्रिया है जो किसी व्यक्ति की सांस या हृदय गति के रुकने पर उसकी जान बचाने में मदद कर सकती है । इससे कार्डियक अरेस्ट और सांस न ले पाने जैसी आपातकालीन स्थिति में व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है । सीपीआर कोई दवा या इंजेक्शन नहीं है।
यह एक तरह की प्रक्रिया है, जिसे मरीज़ के शरीर पर इस्तेमाल किया जाता है, इस प्रक्रिया में पीड़ित व्यक्ति की सांस रुक जाने पर उसकी सांस वापस लाने तक या दिल की धड़कन सामान्य हो जाने तक उसकी छाती को दबाया जाता है, जिससे शरीर में मौजूद खून पुन: संचारित होने लगता है । साथ ही इस प्रक्रिया के दौरान एक निर्धारित समय पर मरीज के मुंह में मुंह से सांस भी दी जाती है । इस दौरान सीपीआर देने का डेमो देकर के भी समझाया गया।
प्रशिक्षण में नगर पुलिस अधीक्षक श्री गौरव पाटिल, रक्षित निरीक्षक श्री सुनील दीक्षित, यातायात थाना प्रभारी श्री राजेश बारवाल, थाना प्रभारी कोतवाली, शिकारपुरा गणपति नाका लालबाग एवं पुलिस फोर्स के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

