अबरार अली, ब्यूरो चीफ, सिद्धार्थ नगर (यूपी), NIT:
हड्डियाँ मनुष्य को सुंदर कद-काठी प्रदान करती हैं। शरीर की हर हड्डी का अपना एक विशेष कार्य होता है। यदि हड्डियाँ कमजोर हो जाएँ तो शरीर में तरह-तरह की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
यह बातें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटवा में कार्यरत हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं सर्जन डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने गुरुवार को एक भेंटवार्ता के दौरान कही। आपको बता दें कि डॉ. चौधरी लखनऊ स्थित मेडिकल कॉलेज में भी अपनी सेवाएँ दे चुके हैं।
उन्होंने कहा कि हमें नियमित रूप से अपनी हड्डियों की सेहत को लेकर सतर्क रहना चाहिए। उचित व्यायाम और संतुलित आहार का सेवन करने से हड्डियाँ स्वस्थ और मजबूत रहती हैं।
डॉ. चौधरी ने बताया कि हड्डियों की प्रमुख बीमारियों में शामिल हैं—
• ऑस्टियोपोरोसिस : जिसे हड्डियों का पतला और कमजोर होना कहा जाता है।
• रिकेट्स : बच्चों में हड्डियों की कमजोरी की स्थिति।
• ऑस्टियोमायलाइटिस : हड्डी में होने वाला संक्रमण।
• ऑस्टियोआर्थराइटिस : गठिया की सामान्य बीमारी, जिसमें जोड़ों की उपास्थि घिस जाती है।
• एंकिलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस : गठिया का एक प्रकार, जो मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी और बड़े जोड़ों को प्रभावित करता है।
इन बीमारियों का कारण कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी, आनुवंशिक कारण, उम्र बढ़ना और कुछ दवाइयों का अधिक सेवन हो सकता है। प्रत्येक बीमारी के कारण, लक्षण और उपचार पर विस्तार से आगे भी जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि समय के साथ हड्डियों में कमजोरी के लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं, जैसे—
• हड्डियों में दर्द
• बार-बार फ्रैक्चर का खतरा
• थकान व सुस्ती रहना
सामान्य उपचार में विटामिन-डी और कैल्शियम सप्लीमेंट, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम शामिल है। गंभीर मामलों में योग्य चिकित्सक से परामर्श लेकर दवाओं का सेवन करें। कुछ स्थितियों में सर्जरी की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

