दयाशंकर पांडेय, ब्यूरो चीफ, प्रतापगढ़ (यूपी), NIT:
श्रीमद्भागवत पुराण कथा के चौथे दिन की शुरुआत आज 17 नवम्बर को महिलाओं और पुरुषों द्वारा हुई। कथा में मनु और शतरूपा की पुत्री आकूति के गर्भ से एक पुरुष और एक स्त्री का जोड़ा उत्पन्न हुआ।
इनमें जो पुरुष थे, वह साक्षात् यज्ञ स्वरूप धारी भगवान विष्णु थे, और जो स्त्री थीं, वह लक्ष्मी जी की अंश स्वरूपा “दक्षिणा” थीं। मनु जी अपनी पुत्री आकूति के उस परम तेजस्वी पुत्र (यज्ञ भगवान) को बड़ी प्रसन्नता से अपने घर ले आए और दक्षिणा को रुचि प्रजापति ने अपने पास रखा।
दक्षिणा विवाह योग्य हुईं और उन्होंने यज्ञ भगवान को ही पति रूप में प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की। तब भगवान यज्ञ पुरुष ने उनसे विवाह किया। दक्षिणा को बड़ा संतोष हुआ। भगवान ने प्रसन्न होकर 12 पुत्र उत्पन्न किए।
कथा के दौरान बताया गया कि जो पुरुष भगवान के शरणागत परम भागवत राजाओं का यह पवित्र चरित्र सुनेगा, उसे दीर्घ धन, सुयश, क्षेम और सद्गति की प्राप्ति होगी।
कथा के यजमान सूर्य नारायण शुक्ला (भूतपूर्व उत्तर प्रदेश पुलिस दीवान), उनके पुत्र मुकेश शुक्ला (उद्योगपति एवं समाजसेवी), रत्नेश शुक्ला (पत्रकार, प्रतापगढ़) और सूर्यनारायण शुक्ला कथा यजमान के नाती अंकित शुक्ला (इंजीनियर) उपस्थित रहे।
यह कथा ग्राम सभा खरगीपुर के देवगलपुर, कमासिन, बाघराय, प्रतापगढ़ में आयोजित की जा रही है। व्यास पीठ पर कथा प्रवक्ता आचार्य सत्यम जी महाराज, श्रीधाम वृन्दावन वाले, कथा कह रहे हैं।

