नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र के जलगांव जिले से जामनेर निवासी उद्यमी राजकुमार कावड़िया की अकस्मात मौत का मामला घटना के चार दिन बाद तक कानून व्यवस्था के विशेष संज्ञान से बाहर नज़र आ रहा है। 57 साल के कावड़िया ने 10 नवंबर की सुबह जलगांव में जहर पी कर अपना जीवन समाप्त कर लिया। सहमे हुए दामाद ने मौत का कारण दिल का दौरा बताया लेकिन डॉक्टर की रिपोर्ट पर पुलिस ने जहर पीने से मृत्यू होने की पुष्टी की है।
प्रकाशचंद जैन मल्टीपर्पज संस्था के भीतर अचानक उजागर हुए कथित गैर कानूनी व्यवहारों के चलते मानसिक तनाव से गुजर रहे कावड़िया के मौत की घटना लंबे समय के अवसाद का नतीजा है। कावड़िया द्वारा दुनिया को अलविदा कहने के बाद पीछे छुटे सैकड़ों सवालों का वर्तमान में एकमात्र जवाब “क्लीन चिट” है। भविष्य में कई फाइलों से धूल हटाई जाएगी तब उसमें एक केस यह भी होगी तब तक इंसानियत को इंसाफ़ का इंतजार रहेगा।
राजकुमार कावड़िया के परिवारजनों ने किसी को कठघरे में खड़ा नहीं किया है। इस मामले पर मराठी में छपने वाले प्रमुख अखबारों के जिला संस्करणों ने प्रकाशचंद जैन शिक्षा संस्था से संबंधित कानूनी पचड़ों की बेहतर रिपोर्टिंग की है। आज के दौर में पत्रकारों के अपने फसाने हैं तीर भी चलाने हैं और परिंदे भी बचाने हैं।
सीसीआई शुरू, नहीं बढ़े कपास के दाम :
भारतीय कपास निगम लिमिटेड और सी सी आई ने देशभर में कपास खरीद शुरू कर दी है। जलगांव कृषि उपज मंडी के अधीन जामनेर इकाई में के के कोटेक्स में कृषि उपज मंडी के चेयरमैन अशोक पाटिल , समाजसेवी जितेंद्र पाटिल के हाथों कपास खरीद शुरू करी गई। महिला किसान उषा रणजीत वाघ से प्रति क्विंटल 7898 के दर से कपास खरीदी गई। मौके पर मंडी के सभी संचालक , सी सी आई केंद्र प्रभारी प्रवीण पाटिल , ईश्वर कोठारी , प्रकाशचंद कोठारी , प्रमोद कोठारी मौजूद रहे। संस्था के सचिव प्रसाद पाटिल ने प्रेस नोट में बताया कि सभी किसान “कपास किसान” नाम के ऐप पर पंजीकरण कर कपास खरीद बिक्री प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।

