हिन्दी साहित्य सम्मेलन की पत्रिका ‘माध्यम’ का पुनर्प्रकाशन : सम्मेलन की गौरवशाली परंपरा को मिला नया आयाम | New India Times

अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

हिन्दी साहित्य सम्मेलन की पत्रिका ‘माध्यम’ का पुनर्प्रकाशन : सम्मेलन की गौरवशाली परंपरा को मिला नया आयाम | New India Times

किसी भी साहित्यिक संस्थान की प्रगति और समृद्धि का आधार उसकी पत्रिका और उसके द्वारा प्रकाशित पुस्तकें होती हैं। इस दृष्टि से हिन्दी साहित्य सम्मेलन का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है। यहाँ से प्रकाशित पत्रिकाएँ — सम्मेलन पत्रिका, राष्ट्रभाषा संदेश और माध्यम — हिन्दी साहित्य जगत की मानक एवं विचारोत्तेजक पत्रिकाएँ सिद्ध हुई हैं।
साहित्य के क्षेत्र में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने वाली पत्रिका ‘माध्यम’ संयोगवश एक अरसे से बंद थी।

यदि इसके इतिहास पर दृष्टि डालें, तो ज्ञात होता है कि हिन्दी के महत्वपूर्ण कवि बालकृष्ण राव के संपादन में, सम्मेलन के तत्कालीन प्रधानमंत्री प्रभात मिश्र जी के सहयोग से, वर्ष 1964 में इसका साहित्यिक शुभारंभ हुआ। इसके बाद 1969 तक उन्होंने उत्कृष्ट रूप से संपादन का कार्य किया। कुछ कारणोंवश 1969 में इसका प्रकाशन बंद हो गया, किंतु 2001 में सत्यप्रकाश मिश्र जी ने सम्मेलन के प्रधानमंत्री विभूति मिश्र जी के सहयोग से इसका पुनः प्रकाशन प्रारंभ किया।

वर्ष 2007 में सत्यप्रकाश जी के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के बाद, उनकी स्मृति में प्रकाशित विशेषांक के पश्चात इसका प्रकाशन पुनः बंद हो गया। अब 2025 में इसके पुनर्प्रकाशन की दिशा में सम्मेलन के वर्तमान प्रधानमंत्री कुन्तक मिश्र जी ने पहल की है। इसके वर्तमान संपादन का दायित्व इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर राजेश कुमार गर्ग जी को सौंपा गया है।

उनके कुशल संपादन में ‘माध्यम’ का वर्ष 2025 का नवीनतम अंक प्रकाशित हुआ है, जो “इक्कीसवीं सदी की हिन्दी कविता” पर केंद्रित है। सम्मेलन के प्रधानमंत्री कुन्तक मिश्र जी ने बताया कि शीघ्र ही पत्रिका का 2026 का अगला अंक भी प्रकाशित किया जाएगा, जो “हिन्दी साहित्य में भारत बोध” पर केंद्रित होगा।

उल्लेखनीय है कि इस पत्रिका की आरंभिक यात्रा नेमिचन्द्र जैन, अमृत राय, रामस्वरूप चतुर्वेदी, विद्यानिवास मिश्र, रघुवंश, केशवचन्द्र वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, जगदीश गुप्त, हरिवंश राय बच्चन, प्रयागनारायण त्रिपाठी जैसी साहित्यिक विभूतियों के साथ प्रारंभ हुई थी।

कालांतर में बनारसीदास चतुर्वेदी, राय कृष्णदास, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर, देवीशंकर अवस्थी, मन्मथनाथ गुप्त, शिवानी, रमेशकुंतल मेघ, प्रभाकर माचवे, बच्चन सिंह, रामधारी सिंह दिनकर, अशोक वाजपेयी, भारतभूषण अग्रवाल, रामदरश मिश्र, मलयज, विजयदेव नारायण साही और शिवप्रसाद सिंह जैसी प्रतिष्ठित साहित्यिक हस्तियों ने अपनी रचनाओं द्वारा इसे समृद्ध किया।

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