आतिश दीपंकर, पटना ( बिहार ), NIT;
बिहार पंचायत-नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ ( 2565/11) के आह्वान पर नियोजित शिक्षकों को सातवें वेतन का लाभ नहीं देने की बात पर बिहार के सभी जिलों के मुख्यालय में किए गये मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री का पुतला दहन कार्यक्रम ने रंग लाया है।15 जनवरी के अल्टीमेटम के पहले ही बेगुसराय में निश्चय यात्रा के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने नियोजित शिक्षकों को भी सातवें वेतन का लाभ देने की बात की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष पूरण कुमार ने मुख्यमंत्री के घोषणा का स्वागत किया है।
वहीं कोसी शिक्षक स्वाभिमान मंच के प्रदेश अध्यक्ष सह भाजपा नेता डॉ नीतेश कुमार यादव ने कहा कि नितीश सरकार सातवां वेतनमान सिर्फ शिक्षकों को भटकाने के लिए नही देने की बात कही थी। यह साबित हो गया कि नितीश जी पेट में दांत रखकर बोलते हैं। सरकार वेतनमान की बात कर शिक्षकों को “समान काम समान वेतन” से भटकाने का पूरा प्रयास किया है जिसे मैं होने नहीं दूंगा। बिहार के शिक्षक अब जान चुके हैं कि क्यों वित्त सचिव से सातवां वेतनमान का मुद्दा उठवाया गया है। वह इसलिए की नितीश सरकार सिर्फ जदयू को क्रेडिट दिलवाना चाहती है, इससे तो स्पस्ट है कि महागठबंधन में टूट है लेकिन शिक्षकों को समान काम का समान वेतन ही एक मात्र लक्ष्य है। जिसको लेकर शिक्षकों में जबर्दस्त आक्रोश है। वक्त रहते सरकार कुम्भकर्णी निद्रा से जागे और जो शिक्षकों की प्रमुख मांगों में से एक “समान काम का समान वेतन” हर हाल में दे नहीं तो शिक्षकों का आक्रोश झेलने को तैयार रहे। जबतक नितीश सरकार शिक्षकों को सरकारी कर्मी का दर्जा और समान काम का समान वेतन नहीं दे देती है तबतक शिक्षक अपनी आत्मसम्मान के लिए आंदोलन करते रहेंगा और मैं शिक्षकों के साथ होकर सदैव सरकार के विरुद्ध लड़ता रहूँगा।
