भारत में तेजी से फैल रहा नया फंगस: ट्राइकोफाइटन इंडोटिनिया (Trichophyton indotineae) | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल में आयोजित “क्‍यूटिकॉन एमपी 2025” कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों द्वारा उल्लिखित नया फंगस मुख्य रूप से ट्राइकोफाइटन इंडोटिनिया (T. indotineae) है, जो दाद (टिनिया कॉर्पोरिस) का कारण बन रहा है।

यह एक डर्मेटोफाइट फंगस है, जो त्वचा, बाल और नाखूनों को प्रभावित करता है। यह दक्षिण एशिया, विशेष रूप से भारत में पिछले एक दशक से तेजी से फैल रहा है और अब यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका तथा मध्य पूर्व तक पहुँच चुका है। यह सामान्य दाद से अधिक गंभीर, व्यापक और इलाज-प्रतिरोधी है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक परेशानी होती है।

विशेषताएँ और लक्षण
दिखावट: त्वचा पर बड़े-बड़े गोलाकार, लाल, खुजली वाले धब्बे (रिंग-आकार के रैश) जो पूरे शरीर पर फैल सकते हैं—जैसे ट्रंक, गर्दन, हाथ-पैर। कभी-कभी जननांग क्षेत्र को भी प्रभावित करते हैं।

गंभीरता: यह सामान्य दाद से अलग है क्योंकि यह बड़े क्षेत्रों को च­­­­ह­­ल-पहल से कवर कर सकता है और भारी छीलन-फ्लेकिंग या स्केलिंग के साथ होता है।

फैलाव: भारत में गर्मी, नमी तथा भीड़-भाड़ वाले इलाकों में यह तेजी से फैलता है। पशुओं (जैसे कुत्ते, मवेशी) से इंसानों में संक्रमण की संभावना भी बनी हुई है।

इलाज में समस्या: क्यों ठीक नहीं हो रहा?
एंटीफंगल-प्रतिरोध (Resistance): इस फंगस में जेनेटिक म्‍युटेशन होते हैं, जो इसे टेरबिनाफाइन (Terbinafine) जैसी पहली पंक्ति की दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बना देते हैं। भारत में ओवर-द-काउंटर (OTC) दवाओं के गलत एवं अतिशय उपयोग के कारण यह फंगस और मजबूत हो गया है। कई मामलों में इट्राकोनाजोल (Itraconazole) भी विफल साबित हो रही है।

OTC दवाओं का खतरा: कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर की सलाह के खरीदी जा रही क्रीम या ट्यूब (जैसे स्टेरॉयड-मिश्रित) त्वचा को जूंझ रही हैं और संक्रमण को बढ़ा रही हैं। कई उत्पादों में असली एंटीफंगल नहीं होता, जिससे फंगस और फैलता है।

वैश्विक चिंता World Health Organization (WHO) ने इसे “प्रायोरिटी फंगल पाथोजन” सूची में शामिल किया है। भारत में पिछले दस वर्षों में त्वचा संक्रमण के मामलों में बहुत वृद्धि हुई है और यह अब वैश्विक महामारी का रूप ले रहा है।

कारण: क्यों फैल रहा है?
ओवरयूज़ ऑफ ड्रग्स: भारत में टेरबिनाफाइन और इट्राकोनाजोल का गलत खुराक (مثلاً 400 mg लंबे समय तक) फंगस को म्‍युटेट करने का अवसर देता है।

पर्यावरणीय कारक: उष्णकटिबंधीय जलवायु, स्वच्छता की कमी और पशु-पक्षियों के संपर्क से जोखिम बढ़ता है।

यात्रा-संबंधी फैलाव: दक्षिण एशिया से अन्य देशों में यह फैला है, जैसे अमेरिका के न्यूयॉर्क में भी मामले सामने आए हैं।

इलाज के विकल्प
डायग्नोसिस: सामान्य लैब-टेस्ट से पहचान मुश्किल हो सकती है; जीनोमिक सीक्वेंसिंग आवश्यक हो सकती है।

उपचार: OTC दवाओं का उपयोग न करें; त्वचा रोग विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें। स्टेरॉयड क्रीम बिल्कुल न लगाएं क्योंकि ये संक्रमण को बदतर बना सकती हैं।

रोकथाम: त्वचा को साफ-सुथरा रखें, संक्रमित व्यक्ति/वस्तुओं से दूरी बनाए रखें, यात्रा-इतिहास डॉक्टर को बताएं।

निष्कर्ष: यह फंगस सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन सही निदान और उचित उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। यदि आपको दाद जैसे लक्षण नजर आते हैं, तो देर किए बिना डॉक्टर से मिलें।

By nit

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