अंकित तिवारी, वाराणसी (यूपी), NIT:

अनियोजित नगरीय विकास, औद्योगिकरण और विकृत आस्था का सर्वाधिक दुष्प्रभाव संपूर्ण विश्व में नदियों की निर्मलता एवं अविरलता पर पड़ा है। इसलिए न केवल नदियों की अविरलता और निर्मलता अपितु संपूर्ण जल स्रोतों कुंण्डों तालाबों में सर्वकालिक रूप से निर्मल जल की उपलब्धता का भाव जब तक जन-जन के मन में स्थाई रूप से समाविष्ट नहीं हो जाता, तब तक संपूर्ण रूप से भारत और विश्व की नदियों सहित जल क्षेत्रों (जल तीर्थों) की सुरक्षा संभव नहीं हो पाएगी। उक्त विचार आज विश्व नदी दिवस के अवसर पर रामेश्वर में मां वरुणा के तट पर आयोजित कार्यक्रम में गंगा समग्र के सह प्रांत संयोजक दिवाकर द्विवेदी ने व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि विश्व की संपूर्ण सभ्यता नदी घाटी के किनारे ही विकसित हुई है। अनेकों देशों की राजधानियां और बड़े नगर नदी के तट पर ही बसे हैं। पूरी दुनिया जल प्रदूषण की शिकार होती जा रही है। पेयजल के संकट के साथ ही लोग जल से होने वाली अनेकों बीमारियों से जूझ रहे हैं।
अपने संबोधन में गंगा समग्र के गंगा भाग संयोजक चंद्र प्रकाश ने नदियों की अविरलता और निर्मलता के लिए गंगा समग्र द्वारा अपने 15 आयामों के माध्यम से सामाजिक जागरूकता के लिए किये जा रहे कार्यों की जानकारी दिया और कार्यकर्ताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि नदियों की अबिरलता,निर्बलता और जल संरक्षण के लिए कार्यकर्ताओं को अपने नित्य के कार्यों के साथ इस कार्य को भी जोड़ कर चलना पड़ेगा।

कार्यकर्ताओं द्वारा सर्वप्रथम मां वरुणा के घाट की संपूर्ण सफाई किया गया। तदुपरांत मां वरुणा के पूजन,आरती और संगोष्ठी का कार्यक्रम संपन्न हुआ। पूजन कार्य पंडित चंदन पांडेय द्वारा विधि विधान से संपन्न कराया गया।
कार्यक्रम का आयोजन गंगा समग्र के जिला संयोजक धर्मेंद्र पांडेय द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में काशी प्रांत के कोषाध्यक्ष और जैविक आयाम प्रमुख रणदीप सिंह, जिला सहसंयोजक राज नारायण पटेल एवं अमरीश उपाध्याय, वृक्षारोपण आयाम प्रमुख भगत राम यादव, शैक्षणिक आयाम प्रमुख जयप्रकाश दुबे, पर्व आयाम प्रमुख अशोक सिंह, वरुणा नदी समिति प्रमुख आशीष राजभर, खंडसंयोजक हरहुआ वंशराज यादव, खंड संयोजक चोलापुर विनोद मिश्रा, खंड संयोजक पिण्ड्रा सत्येंद्र उपाध्याय, अनीश सिंह, धनंजय त्रिपाठी, आदित्य पांडेय, गिरिजेश चौबे, जय हिंद पाल, राम आसरे आदि अनेकों लोग उपस्थित रहे।

