मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

हिंदू सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज पर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं। बुरहानपुर ज़िले में भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपरा का पावन पर्व हरतालिका तीज, सुहागिन स्त्रियों और कन्याओं द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। महिलाओं ने हरतालिका तीज पर एक दूसरों को हल्दी कुमकुम लगाकर शुभकामनाएं बधाई दी। उपनगर लालबाग स्थित सिलाई कोचिंग महिला ने सभी महिलाओं के साथ मिलकर हरितालिका व्रत पूजन किया।
श्रीमती मंदा महाजन ने बताया कि यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है। “हरतालिका” शब्द का अर्थ है-“हरित” अर्थात हर लेना और “आलिका” अर्थात सखी। मान्यता है कि भगवान शिव को पति रूप में पाने की तीव्र इच्छा से पार्वती जी ने अपनी सखी के सहयोग से वन में जाकर कठोर तपस्या की थी। उनकी इसी तपस्या के परिणामस्वरूप उन्हें शिव जी पति रूप में प्राप्त हुए। तभी से यह पर्व स्त्रियों के लिए सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की प्राप्ति का प्रतीक बन गया है।
हरितालिका व्रत पर महिलाएं प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल पर मिट्टी या बालू की शिव-पार्वती प्रतिमा बनाकर उनका श्रृंगार किया जाता है। हरतालिका तीज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि यह स्त्रियों की आस्था, धैर्य और समर्पण का प्रतीक है। यह पर्व जीवन में समृद्धि, सौभाग्य और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना के साथ मनाया जाता है। हरतालिका तीज समाज में प्रेम, एकता और स्त्री-शक्ति के महत्व को प्रतिपादित करता है।
हरतालिका तीज केवल व्रत और उपवास का दिन नहीं, बल्कि यह स्त्रियों के लिए अपने परिवार और पति के दीर्घायु जीवन हेतु अटूट श्रद्धा, आस्था और प्रेम का अटूट बंधन होता है। हरितालिका पूजन में श्रीमती लीलाबाई महाजन, श्रीमती मंदा महाजन, श्रीमती कल्पना कुलथे, श्रीमती जया महाजन, श्रीमती अंजलि पाटिल आदि महिलाएं उपस्थिति रही

