अबरार अहमद खान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट समीर खान ने मध्यप्रदेश हज कमेटी पर गंभीर भ्रष्टाचार और सूचना छिपाने का आरोप लगाया है। समीर खान के अनुसार, उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2022 और 2023 की ऑडिट रिपोर्ट की मांग की थी।
इस पर हज कमेटी द्वारा पत्र क्रमांक MPSHC/102/1779 दिनांक 27/03/2025 के माध्यम से कार्यालय आयुक्त, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मध्यप्रदेश को जवाब प्रस्तुत कर कहा गया कि जानकारी अपीलार्थी (समीर खान) को भेज दी गई है। लेकिन समीर खान को आज तक ऐसी कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई।
जब समीर खान ने दिनांक 16 जुलाई 2025 को हज कमेटी कार्यालय का निरीक्षण कर सूचना की प्रति प्राप्त करने का प्रयास किया, तो पाया कि उक्त पत्र का कोई रिकॉर्ड ऑफिस डिस्पैच रजिस्टर और कंप्यूटर सिस्टम में मौजूद नहीं है। कार्यालय के कर्मचारियों ने पहले टालमटोल किया और बाद में कहा कि पत्र “गुम हो गया है”।
समीर खान द्वारा जब वरिष्ठ अधिकारी मसूद अख़्तर से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए कहा –
“आपका सूचना आवेदन निरस्त कर दिया गया है। आप दोबारा आवेदन करिए। अधिकतम क्या होगा – राज्य सूचना आयोग ₹25,000/- का जुर्माना लगाएगा, वो हम जमा कर देंगे।”
आरटीआई एक्टिविस्ट समीर खान ने आगे कहा कि विभाग की ऑडिट रिपोर्ट को छुपाना इस बात का प्रमाण है कि विभाग में कहीं न कहीं बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने का संकेत है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके।
उन्होंने इस प्रकरण को गंभीर मानते हुए राज्य सूचना आयोग और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक आयोग को पत्र लिखकर जाँच की माँग की है। साथ ही संबंधित अधिकारियों की सेवा पुस्तिका (Service Book) में आपत्ति दर्ज करने और अनुशासनात्मक कार्यवाही की माँग की है।
समीर खान ने यह भी कहा है कि यदि इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना व्यवस्था यूं ही चलती रही, तो वह माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

