राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की बैठक हुई संपन्न | New India Times

शमसुद्दोहा, ब्यूरो चीफ, गोरखपुर (यूपी), NIT: 

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की एक आवश्यक बैठक विकास भवन में हुई। इसकी अध्यक्षता विकास भवन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष गोविंद जी श्रीवास्तव और संचालन राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री मदन मुरारी शुक्ल ने किया। बैठक का मुख्य मुद्दा देश के लाखों अर्धसैनिक बलों का पुरानी पेंशन बहाल करना कोरोना कल में फ्रिज डेढ़ साल का एरियर, महंगाई भत्ते का 50% मूल वेतन में मर्जर,रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति किए जाना,निजीकरण बंद किया जाना तथा कर्मचारी/पेंशनरों आठवां वेतन मान समय से दिया जाना आदि महत्वपूर्ण मांगे थी। बैठक को संबोधित करते हुए परिषद के अध्यक्ष रूपेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा यह कितने कष्ट का विषय है कि लोक तंत्र में वर्तमान सरकार मांगों पर विचार नहीं कर रही है जबकि देश का कर्मचारी सरकार से नाराज आक्रोशित, एवम् गुस्से में है जैसे पुरानी पेंशन के स्थान पर कर्मचारी न्यू पेंशन या एकीकृत पेंशन स्वीकार नहीं कर रहा है कर्मचारी नाराज है जहां कर्मचारियों को एक पेंशन के लाले पड़े है वह माननीयों को चार चार पेंशन दी जा रही है जो कि संविधानिक व्यवस्था के विरुद्ध है वर्तमान सरकार श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्शो पर चलने वाली सरकार है जिन्होंने देश में  एक विधान एक प्रधान और एक निशान का नारा दिया था आज कर्मचारी समाज भी उन्हीं के आदर्शों को अपनाते हुए कर्मचारी समाज के लिए वन रैंक वन पेंशन की मांग कर रहा है उन्होंने कहा कि सरकार जिस सैनिकों का गुणगान करती है उन्हीं अर्द्धसैनिक बलों को सरकार पेंशन के लिए तरसा रही है।अभी हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में हमारे सैनिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और पाकिस्तान के साथ ही चीन और हमारे दुश्मन देशों को भी ये बता दिया कि हम समय आने पर देश के लिए प्राण भी दे सकते है।
महामंत्री मदन मुरारी शुक्ला ने कहा कि कोरोना काल में सरकार आर्थिक संकट का हवाला देकर जिन भत्तों को निलंबित किया था अब समय आ गया है कि सरकार अब सभी भत्तों को बहाल करे क्योंकि अब देश आर्थिक संकट से निकल चुका है और विश्व की चौथी बड़ी इकोनॉमी बन चुका है।

इस अवसर पर गोविंद जी श्रीवास्तव रूपेश कुमार मदन मुरारी शुक्ल पंडित श्याम नारायण शुक्ल राजेश मिश्रा अनूप कुमार इंजीनियर सौरभ श्रीवास्तव इजहार अली सहित तमाम कर्मचारी उपस्थित रहे।

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