मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश शासन की स्थानांतरण नीति की धज्जियां उड़ाते हुए बुरहानपुर नगर निगम में बीते तीन सालों से अधिक समय से पदस्थ निगमायुक्त संदीप श्रीवास्तव प्रशासनिक और जनहित के हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। शहर की बुनियादी समस्याओं से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक, नगर निगम प्रशासन की लापरवाही के कारण आज ना केवल बुरहानपुर का आम नागरिक त्रस्त, बेहाल है, बल्कि नगर निगम का प्रत्येक चुना हुआ जनप्रतिनिधि पार्षद भी निगम आयुक्त की कार्यशैली से परेशान है। यह गंभीर आरोप सामाजिक कार्यकर्ता ठाकुर प्रियांक सिंह ने एक प्रेस बयान जारी करते हुए लगाए हैं।
मजदूर यूनियन अध्यक्ष ठाकुर प्रियांक सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि किसी भी कार्यपालिक अधिकारी को एक ही स्थान पर तीन वर्ष से अधिक समय तक पदस्थ नहीं रखा जाना चाहिए, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे। परंतु बुरहानपुर में निगमायुक्त नियम-कायदों को ताक पर रखकर कुंडली मारकर बैठे हैं। उनके इस अत्यधिक लंबे कार्यकाल का परिणाम यह हुआ है कि पूरे शहर में प्रशासनिक शिथिलता और घोर लापरवाही का माहौल बन चुका है।
हस्तांतरण के नियम:
मध्य प्रदेश सरकार की तबादला नीति के अनुसार, प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के कार्यपालिक अधिकारियों कर्मचारियों के लिए एक ही स्थान या जिले में 3 वर्ष की समय-सीमा निर्धारित की गई है। सामान्य प्रक्रिया (रूटीन प्रोसेस) के तहत 03 तीन साल पूरे होने पर प्रशासनिक आधार पर तबादला कर दिया जाता है। लेकिन, कोई अधिकारी या सदस्य 03 तीन वर्ष से अधिक समय तक एक ही स्थान पर कुछ स्पष्ट प्रावधानों और अपवादों के अनुसार ही रह सकता है जैसे किसी अधिकारी के सेवाकाल में जिले में अति विशिष्ट कार्य सफलता पूर्वक किए जा रहे है, इत्यादि। परंतु निगम आयुक्त के कार्यकाल की विफलताओं के कारण बुरहानपुर की जनता रोने पर मजबूर हो गई है और उनका हस्तांतरण जनहित में जरूरी हो गया है।
निगमायुक्त की विफलताओं के मुख्य कारण:
1. पेयजल का गंभीर संकट:
ऐतिहासिक जल संरचनाओं के लिए मशहूर बुरहानपुर शहर आज पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहा है। कई वार्डों में हफ़्तों तक सुचारू पेयजल आपूर्ति नहीं होती। अमृत योजना और जल प्रदाय योजनाओं के क्रियान्वयन में निगम प्रशासन पूरी तरह फेल रहा है, जिसके कारण जनता को इस भीषण गर्मी और संकट के समय में भी निजी टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
2. स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की बदहाली:
स्वच्छ भारत अभियान के दावों के विपरीत बुरहानपुर की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। शहर के मुख्य बाजारों से लेकर रिहायशी इलाकों तक में कचरे के ढेर लगे हुए हैं। नाले-नालियां चोक पड़ी हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की व्यवस्था भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन की भेंट चढ़ चुकी है।
3. पवित्र ताप्ती नदी का प्रदूषण और जलीय जीवों की मौत:
निगमायुक्त संदीप श्रीवास्तव की सबसे बड़ी विफलता शहर की जीवनदायिनी ताप्ती नदी के संरक्षण को लेकर रही है। शहर भर के गंदे नाले और दूषित जल बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे ताप्ती नदी में बहाए जा रहे हैं। नदी का पानी इस कदर जहरीला हो चुका है कि हाल ही में बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत के मामले सामने आए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण नियमों की सरेआम अवहेलना हो रही है, लेकिन निगमायुक्त हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
4. जर्जर सड़कें और गड्ढों का साम्राज्य:
शहर की मुख्य सड़कों से लेकर आंतरिक मार्गों तक की हालत बद से बदतर हो चुकी है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं। पेचवर्क और सड़क निर्माण के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जा रही है, जिससे जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग साफ नजर आता है।
5. बारिश में जगह-जगह जल भराव:
वर्षा ऋतु के प्रारंभ होते ही शहर में जगह-जगह जल भराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है जिस कारण हर ओर केवल कीचड़ ही कीचड़ दिखाई देता है। आम जनमानस का सड़कों पर चलना अत्यंत मुश्किल हो चुका है। जल भराव से लोगों को सड़कों के गड्ढे नजर नहीं आ रहे जिससे एक्सीडेंट की संभावना बढ़ जाती है।
यूनियन अध्यक्ष ठाकुर ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस प्रशासनिक विफलता और नियम विरुद्ध पदस्थापना के खिलाफ उन्होंने मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग को औपचारिक शिकायत भेजकर निगमायुक्त के तत्काल स्थानांतरण की मांग की है परंतु कोई राजनेता निगम आयुक्त को बुरहानपुर से जाने नहीं देना चाहता और उनका स्थानांतरण होने से रोक रहा है।
बुरहानपुर की जनता के हितों की रक्षा के लिए माननीय उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) में एक जनहित याचिका नगर निगम आयुक्त के स्थानांतरण के विषय पर दायर की है। बुरहानपुर को इस प्रशासनिक तानाशाही और विफलता से मुक्त कराने के लिए यह लड़ाई सड़क से लेकर न्यायालय तक लड़ी जाएगी।

