नम्रता, धैर्यता, मधुरता, करुणा, दया, क्षमा जैसे गुणों को जीवन का हिस्सा बनाना ही जीवन का आनंद लेना है : ब्रह्माकुमारी आदर्श दीदी | New India Times

गुलशन परूथी, ब्यूरो चीफ, दतिया (मप्र), NIT:


प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के माधव गंज स्थित प्रभु उपहार भवन में गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर विशेष ध्यान साधना एवं सत्संग का आयोजन हुआ। जिसमें हजारों की संख्या में सुबह से शाम तक श्रद्धालु शामिल हुए।
शुभारंभ में केंद्र प्रमुख राजयोगिनी बीके आदर्श दीदी ने सभी को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं बल्कि गुरु शिष्य की परंपरा का एक उत्सव है। जो हमें हमेशा अच्छाई के रास्ते पर चलने कि प्रेरणा देता है। हमारे जीवन को एक सुंदर दिशा देने में बहुत से लोगों का हाथ होता है, जिन्हें हम गुरु का दर्जा देते है। जिसमें माता-पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक मार्गदर्शक आदि शामिल है। हमें इन सभी का आभारी रहते हुए सदैव इनका आदर और सम्मान करना चाहिए।

नम्रता, धैर्यता, मधुरता, करुणा, दया, क्षमा जैसे गुणों को जीवन का हिस्सा बनाना ही जीवन का आनंद लेना है : ब्रह्माकुमारी आदर्श दीदी | New India Times


और उनके द्वारा दी हुई शिक्षाओं को जीवन मे धारण करना चाहिए। आज जिस तरह कि घटनाएं समाज में देखने को मिलती है। यह मन को विचलित कर देती है। आज जहाँ हम एक ओर भौतिक रीति से सम्पन्न होते जा रहे है, तो वहीं दूसरी ओर नैतिक मूल्यों का पतन भी देखने को मिल रहा है। हमारी उन्नति केवल भौतिक संपन्नता ही नहीं बल्कि आंतरिक रीति से अपने को ज्ञान, गुण और शक्तियों से सुसज्जित कर समाज हित में निरंतर सेवारात रहना भी है। जो लोग अपने जीवन में नम्रता, धैर्यता, मधुरता, करुणा, दया, क्षमा जैसे गुणों को जीवन का हिस्सा बनाते है। वह जीवन का सही आनंद ले पाते है।

नम्रता, धैर्यता, मधुरता, करुणा, दया, क्षमा जैसे गुणों को जीवन का हिस्सा बनाना ही जीवन का आनंद लेना है : ब्रह्माकुमारी आदर्श दीदी | New India Times

दीदी ने आगे कहा कि इस गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर हम सभी के सच्चे मार्गदर्शक एवं सद्गुरु निराकार परमपिता परमात्मा शिव भोले नाथ जो की सभी के गति-सद्गति दाता तथा मुक्ति – जीवनमुक्ति दाता है, सभी को दुःखों से छुड़ाने वाले है, दिव्यवुद्धि के दाता है। उन्हें दिन की शुरुवात में अवश्य याद करें। इसके साथ ही उनको साक्षी मानकर एक संकल्प भी अवश्य लें कि हमारी वजह से कोई दुःखी न हो, कोई निराश न हो। हम दूसरों के जीवन मे खुशी लाने के निमित्त बनें। तभी हम यह कह सकते है कि हमने गुरु की शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात किया है। इससे हम लोगों की दुवाओं का पात्र बनेगें और जीवन को अच्छी रीति से जी सकेंगे।
इस अवसर पर केंद्र पर पधारे सभी श्रद्धालुओं ने ब्रह्माभोजन ग्रहण किया।

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