वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:
कस्बा मैगलगंज से छह किलोमीटर दक्षिण, उत्तरवाहिनी गोमती नदी के पावन तट पर स्थित पौराणिक शिव मंदिर बाबा पराशर नाथ में आज से श्रावण मास की धार्मिक गतिविधियाँ प्रारंभ हो रही हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है, जिसे अश्वत्थामा ने पांडवों के वनवास काल में स्थापित किया था।
मंदिर की एक अद्भुत विशेषता यह भी है कि इसके कपाट खुलने पर शिवलिंग पहले से ही पूजित अवस्था में मिलता है। अब तक कोई श्रद्धालु इसकी प्रथम पूजा नहीं कर सका।
इतिहास के पन्नों में दर्ज है चमत्कार
बताया जाता है कि एक बार मुगल शासक औरंगजेब की सेना ने मंदिर को ध्वस्त करने का प्रयास किया था। पर जैसे ही सैनिक मंदिर में घुसे, उन पर सैकड़ों सांप और बिच्छुओं ने हमला बोल दिया, जिससे सेना को पीछे हटना पड़ा। जाते-जाते उन्होंने मंदिर की कई मूर्तियों को तलवार व भालों से खंडित कर दिया था। ये खंडित मूर्तियां आज भी मंदिर के बाएं ओर बरामदे में रखी हुई हैं, जो इस घटना की साक्षी हैं।
श्रद्धा का केंद्र, मन्नतों का धाम
श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा पराशर नाथ सच्चे मन से की गई हर मन्नत पूरी करते हैं। सावन के महीने में यहाँ देशभर से कांवड़िए और श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मैगलगंज निवासी निशांत तिवारी का कहना है, यह स्थान केवल पूजा का नहीं, आत्मिक शांति का केंद्र है।”
वहीं श्रद्धालु तमाम महिलाएं बताती हैं, हम हर साल सावन में आते हैं, बाबा का चमत्कार हर बार अनुभव होता है।
प्रशासन ने कसी कमर
श्रवण मास के दृष्टिगत प्रशासन ने मेला क्षेत्र में सुरक्षा, सफाई, स्वास्थ्य सुविधा और पेयजल व्यवस्था के विशेष प्रबंध किए हैं। प्रभारी निरीक्षक रविन्द्र पांडेय ने बताया कि मंदिर मार्गों की सफाई पूर्ण कर ली गई है तथा अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। मुख्य प्रवेश मार्गों को व्यवस्थित किया गया है ताकि कांवड़ियों को कोई असुविधा न हो।
प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे संयम और अनुशासन बनाए रखें, निर्धारित मार्गों का पालन करें तथा किसी भी प्रकार की अफवाह या अफरा-तफरी से बचें।
