अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, ग्वालियर/भोपाल (मप्र), NIT:
संविधान निर्माता डॉ० भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति विवाद मामले में ग्वालियर आए भीम सेना चीफ नवाब सतपाल तंवर को ग्वालियर पुलिस ने मुरैना से निकलते ही बॉर्डर पर रोक दिया। एक दर्जन गाड़ियों के काफिले के साथ शहर की सीमा में दाखिल होने का प्रयास कर रहे भीमसेना के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष को 2000 से अधिक पुलिसकर्मी, कई एसडीएम, कई आईपीएस और अन्य अधिकारियों की भारी हरकम फौज लगाकर टॉक दिया गया।
फूलबाग मैदान में डॉ० अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के लिए अड़े तंवर
इस दौरान भीम सेना के चीफ सतपाल तंवर की आईपीएस कृष्ण लाल चंदानी से काफी गर्मा गर्मी और बहस हो गई। अधिकारियों ने तंवर को कहा कि आप आगे नहीं जा सकते। आपके पास अनुमति नहीं है। ऐसे में सतपाल तंवर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और बोले कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 (1) डी उन्हें यह मौलिक अधिकार देता है कि वे भारत के किसी भी राज्य में भ्रमण कर सकते हैं। तंवर ने फूलबाग मैदान में डॉ० अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने की जिद्द कर ली तो अधिकारियों ने उन्हें आगे बढ़ने से जबरन रोक दिया।
भीमसेना सुप्रीमो ने फिर दिए विवादित बयान, प्रशासन बना रहा मूक दर्शक
अधिकारियों से बहस करते हुए नवाब सतपाल तंवर ने फिर से कई विवादित बयान दिए और प्रशासन मूक दर्शक बना सुनता रहा। उन्होंने कहा कि यदि एक कागज के टुकड़े पर मोहर नहीं लगेगी तो क्या हाईकोर्ट में बाबा साहब की प्रतिमा नहीं लगेगी। वहीं सरकार को धमकी देते हुए तंवर ने कहा कि शांति से नहीं तो क्रांति से हो सही, मूर्ति तो वहीं लगेगी। इस दौरान माहौल खराब होता देख पुलिस अधिकारियों ने पीछे हटना जरूरी समझा। लेकिन फिर भी सतपाल अपनी गाड़ी के सनरूफ से बाहर निकलकर बात करते रहे लेकिन अधिकारियों और पत्रकारों से बात करने के लिए गाड़ी से नहीं उतरे।
सुबह से ही गर्मी में धूल फांकते रहे अधिकारी, सुबह 11 बजे का समय देकर दोपहर 2 बजे पहुंचे भीमसेना चीफ
सतपाल तंवर अपने तय समयानुसार ग्वालियर में दाखिल नहीं हुए बल्कि सुबह 11 बजे का समय देकर पूरे 3 घंटे दोपहर 2 बजे पहुंचे। मुरैना से निकलते ही ग्वालियर सीमा में प्रवेश करने के बाद बॉर्डर पर आईपीएस कृष्ण लाल चंदानी के नेतृत्व में मौके पर भारी पुलिस बाद तैनात था। सुबह से हो कई बड़े अधिकारी और 2 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी भरी गर्मी में हांफते नजर आए। सुबह से दोपहर तक अधिकारी धूल फांकते रहे। उन्होंने 3 घंटे देरी से ही सही सतपाल को वहां से वापिस भेजने के बाद ही राहत की सांस ली।
फूलबाग मैदान पर जुटे समर्थक, पुलिस करती रही तीतर-बीतर
भीम सेना के आह्वान पर फूलबाग मैदान में दर्जनों और सैंकड़ों की टोलियों में सतपाल तंवर जुट रहे थे। जिन्हें पुलिस अनुमति ना होने का हवाला देकर पुलिस तीतर-बीतर करती रही। सुबह 10 और 11 के बीच में भीम सेना का हजारों समर्थक जुट चुके थे। जिन्हें पुलिस ने वहां से बलप्रयोग करके हटा दिया था।
तंवर की मौजूदगी से हाई अलर्ट पर रहा मध्य प्रदेश, मुरैना और ग्वालियर में चप्पे-चप्पे पर निगरानी
भीम सेना के मुखिया सतपाल तंवर के ग्वालियर आगमन की सूचना से ऐसा हड़कंप मचा कि मुख्यमंत्री डॉ० मोहन यादव को पूरे मध्य प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित करना पड़ा। मुरैना होते हुए ग्वालियर में दाखिल हो रहे तंवर के कारण मुरैना और ग्वालियर में चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही थी। लेकिन पुलिस का खुफिया तंत्र बिल्कुल नाकाम साबित हुए। सतपाल तंवर ने मुरैना में भी सभा की और ग्वालियर में दाखिल होकर विवाद को एक बार फिर से हवा दे दी है।
29 जून को “भीमराव अग्निपथ महारैली” का ऐलान, आईपीएस चंदानी को सौंपा कलेक्टर के नाम पत्र
पुलिस ने अनुमति का हवाला देकर तंवर को रोक दिया तो एक बार फिर से मामले को हवा देते हुए तंवर ने “भीमराव अग्निपथ महारैली” का ऐलान कर दिया। अधिकारियों के बार-बार निवेदन करने और वापिस लौटने का अनुरोध करने के बाद भीमसेना अध्यक्ष ने कहा कि हम संविधान का पालन करने वाले लोग हैं। आप हमें समय बताएं कि कब तक बाबा साहब डॉ० अम्बेडकर की प्रतिमा हाईकोर्ट में स्थापित कर दी जाएगी। इस पर अधिकारियों ने बताया कि मामला हाईकोर्ट के नवनियुक्त चीफ जस्टिस के पास लंबित है। जल्द इसी तारीख पर फैसला हो जाएगा जिसके लिए अधिकारियों ने 27 जून तक का समय मांगा। ऐसे में तंवर ने कहा कि हम आपके 1 दिन का समय अतिरिक्त दे रहे हैं। आगे 29 जून का दिन हमारा होगा। इसके बाद सतपाल ने “भीमराव अग्निपथ महारैली” का ऐलान करके एक बार फिर से मध्य प्रदेश सरकार की धड़कनें बढ़ा दी हैं। जयपुर हाईकोर्ट में मनु की मूर्ति नहीं रहने देने का बयान देकर भी मध्यप्रदेश से राजस्थान और हरियाणा से दिल्ली तक सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप है।

