नहीं थम रहा छत्रपति के अवमानना का सिलसिला, जामनेर में धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

नहीं थम रहा छत्रपति के अवमानना का सिलसिला, जामनेर में धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास | New India Times

राहुल सोलापुरकर, प्रशांत कोरटकर द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए दिए गए अवमानजनक बयानों के बाद दोनों राजाओं के अपमान का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस सूची में जलगांव जिले के जामनेर से अशफ़ाक अहमद पटेल का नाम लिस्ट हो गया है। हलाल झटका जैसे बयानों से समाज में विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने में सरकार के मंत्री भी पीछे नहीं हैं। पटेल ने किसी गुमनाम किताब का संदर्भ देते हुए औरंगजेब का महिमामंडन करने वाली पोस्ट में छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी राजे को लेकर फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कि। जिसके बाद कर्मठ हिंदू संगठनों ने थाने का रास्ता पकड़ा और पटेल को गिरफ़्तार करने की मांग की।

पूरोगामी विचारधारा के पक्षधर मराठा कुनबी समाज के कार्यकर्ताओं ने वकीलों से अपील की है कोई भी पटेल का वकालतनामा स्वीकार न करे। पुलिस प्रमुख मुरलीधर कासार ने तत्काल प्रभाव से जांच कर प्राथमिकी दर्ज कराई और आरोपी को हिरासत में लिया। विदित हो कि आरोपी अतीत के कई मामलों में विवादित रहा है। धर्मनिरपेक्ष विचारधारा का ध्वजवाहक बतलाने वाला पटेल खुद को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के समर्थक के रूप में पेश करता आया है। पटेल को लेकर कांग्रेस को अपनी भूमिका साफ़ करनी चाहिए। आज पुलिस ने आरोपी को न्या डी एन चामले की कोर्ट मे पेश किया। सहायक सरकारी वकील कृतिका भट ने जांच के लिए अधिकतम पुलिस रिमांड की मांग की। बचाव पक्ष की ओर से अनुच्छेद 19 और सुप्रीम कोर्ट के आदेशो को कोट किया गया जिसका सरकार पक्ष ने पुरजोर विरोध किया। सूत्रों से पता चला कि आरोपी अशफ़ाक पटेल को 15 मार्च तक पुलिस रिमांड मे भेजा गया है।

औरंगजेब को नायक बनाने की दिलचस्पी क्यों ?
भारत के मध्यकालीन इतिहास में मुग़ल और मराठा सत्ता संघर्ष के प्रमुख किरदार रहे हैं। इस संघर्ष में धर्म कोई मायने नहीं रखता था इस बात को वा.सी बेंद्रे , कॉ गोविंद पानसरे , कॉ शरद पाटील , सदानंद मोरे , जयसिंगराव पवार , अशोक राणा जैसे कई लेखकों ने अपनी किताबो मे साक्ष्यों के साथ स्पष्ट किया है। इतिहास के इन किरदारों में से किसी एक को दूसरे के खिलाफ़ खड़ा कर सांप्रदायिक राजनीती को दोनों तरफ़ से हवा दी जाती रही है। औरंगजेब को नायक बनाकर किसी एक समुदाय पर जबरन थोपने वाला पटेल और सांस्कृतिक वर्चस्ववाद के लिए सोलापुरकर, कोरटकर जैसे चिल्लर लोगों द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज छत्रपति संभाजी राजे का चरित्र हनन करने वाली सोच की जड़ उसी दकियानूसी विचारधारा में छिपी है जिस से भारत की समतावादी संत परंपरा और समाज सुधारक सदियों से लड़ रहे हैं।

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