नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

दिल्ली बीजेपी हाइकमान के आदेश के बाद CM देवेन्द्र फडणवीस को नासिक, सिंधुदुर्ग जिले के संरक्षक मंत्री कैंसिल करना पड़े।2015 के कुंभ मे किए प्रबंधन के एक मात्र पैमाने के आधार पर बीजेपी के कुछ नेता गिरीश महाजन की पुनःबहाली के लिए एकनाथ शिंदे और अजीत पवार को मनाने की कवायद में लगे है। इस विवाद ने महायुति के भीतर नाराजगी की वो लकीर खींच दी है जो भविष्य में दिल्ली की सल्तनत अस्थिर करने की वज़ह मे से एक होगी। शिवसेना UBT सांसद संजय राउत के बयानो ने प्रभारी मंत्री पर चल रहे घमासान को कुंभ के बजट से जोड़ दिया है जो सरासर ग़लत भी नहीं है। 2015 में संपन्न कुंभ के आठ साल बाद New India Time’s ने 2023 में त्र्यंबकेश्वर का दौरा किया। जिसमें पाया कि तमाम काम आधे अधूरे और गुणवत्ता रहित है।हमने साधुओं के अखाड़ो की हालत से लेकर गोदाघाट पंचवटी द्वारका इलाके का आंखों देखा सच लिखने का छोटा सा प्रयास किया।

बारा साल बाद 2027 मे नासिक में कुंभ लगने वाला है।प्रयागराज की तर्ज पर इस बार नासिक कुंभ का बजट तगड़ा होगा। नासिक के अभिभावक मंत्री पद के लिए सरकार के तीनों दलों में खींचतान शुरू है। इसी बीच आम जनता कि ओर से यह मांग की जाने लगी है कि मंत्री किसी को भी बना दो इससे कोई मतलब नही बस कुंभ के प्रशासनिक प्रबंधक अधिकारी के पद पर तुकाराम मुंढे की नियुक्ति करवा दी जाए। 100 दिन के एक्शन प्लान से लोकप्रियता का मंच सजाने वाली फडणवीस सरकार जनता की इस मांग को मानेगी ? 2005 बैच के IAS मुंढे 2018 में नासिक महानगर पालिका में CEO थे। ईमानदार अधिकारी होने के कारण 20 साल की सेवा में 23 बार तबादले से सम्मानित किए जा चुके हैं। अभिभावक मंत्री पद पर मिडिया में हो रही चर्चा और सत्ता पक्ष में मची होड़ ने आम जनता को अर्थामृत के विषय में बहस करने का अवसर दे दिया है।

