गुलशन परूथी, ग्वालियर (मप्र), NIT:

ग्वालियर जिला के मोहना कस्बे में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पंडित राजेश अग्निहोत्री भागवताचार्य ने अन्य कथावाचकों को चेतावनी देते हुए कहा कि आप तभी कथा कर पाओगे जब सनातन धर्म और कथाओं को कराने वाले सनातनी बचेंगे। इसलिए कथा सुनाने के साथ साथ सनातनियों को जगाने और एक करने के लिए भी प्रयास करने का कार्य शुरू कर दो नहीं तो आप लोगों को आगे पूछने वाला कोई नहीं होगा
सनातनियों में जागरूकता लाने एवं उत्साह भरने की अत्यन्त आवश्यकता है। भागवताचार्य ने माता पिता के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि पिता का स्थान आकाश से भी ऊंचा होता है और माता का स्थान पिता से दस गुना अधिक होता है।
माता पिता जब संतान को जन्म देते हैं उस समय बो ब्रह्मा के समान और संतान पालन करते समय भगवान विष्णु के समान, और वृद्धावस्था में बो भगवान शिव के समान होते हैं। जिस प्रकार से भगवान शिव हमेशा भजन करते रहते हैं उसी प्रकार संतान को चाहिए कि बो वृद्धावस्था में अपने माता पिता को भरपूर निर्विघ्न रूप से भजन करने देना चाहिए और दान करने में संतान को भरपूर सहयोग करना चाहिए। संसार में माता ही प्रथम गुरू होती है। माता पिता साक्षात् रूप में भगवान शिव और पार्वती के समान हैं सारे तीर्थ आपके घर में ही हैं।

