इम्तियाज़ चिश्ती, ब्यूरो चीफ, दमोह (मप्र), NIT:

मानवता, मानवीयता और इंसानियत इन शब्दों को सुनकर ही लगता है कि हम इन्सान की जीते जी कद्र तो करते ही हैं अगर वह इस दुनियां से चला भी जाये तो उसकी समाधि या क़ब्र के साथ भी कभी बर्बरता नहीं करते बल्कि फूल चढ़ाकर उन्हें नमन करते हुए अपनी श्रद्धा प्रगट करते हैं यही इंसान होने का अर्थ है। लेकिन मध्यप्रदेश के दमोह जिले के नगरपालिका के कर्मचारियों ने लापरवाही का ऐसा सबूत दिया है जिसे देखकर लगता है कि इनकी सारी इंसानियत कहीं खो गई है।

दरअसल नगरपालिका दमोह के सफाई कर्मियों ने दमोह नगर की हटा नाका स्थित सिंगपुर कब्रिस्तान में शहर भर की गंदगी कचरा लाकर कब्रों के बीच डालकर आग लगा दी। यहाँ के चौकीदार की मानें तो ऐसा पहली बार नहीं हुआ पहले भी इसी तरह नगरपालिका की गाड़ी शहर की गन्दगी बीच कब्रिस्तान में डाला करती है। कई बार मना करने के बाद कब्रिस्तान को ही बना दिया कचरा घर जिसे शान्ति स्थल या शहरे खामोश जैसे शब्दों से संबोधित करते आये है उसी शान्त जगह पर बनी मुस्लिम समाज की कब्रिस्तान में नगरपालिका के सफाई कर्मियों ने गन्दगी डाल दी जहाँ मुस्लिम समाज के लोग दुआ प्राथना करने जाते हैं।

