सलमान चिश्ती/शुभम, रायबरेली यूपी), NIT;
वर्षों से सूखी पड़ी पुरवा-ब्रांच नहर में छोड़ा गया पानी नहर धरातल में ही समा गया। सरकारें टेल तक नहरों में पानी पहुंचाने का फर्जी ढिढोरा भले ही पीट रही हों किन्तु सत्यता तो यह है कि एक दर्जन अल्पिकाओं को पानी देने वाली पुरवा-ब्रांच नहर स्वयं ही प्यासी है। जब पुरवा-ब्रांच नहर में ही पानी नहीं होगा तो छोटी-छोटी नहरों से किसानों को पानी मिलना कैसे सम्भव है?
योगी सरकार में किसानों को उम्मीद थी कि नहरों में पानी अवश्य आएगा लेकिन पिछली सरकारों की तरह इस सरकार में भी किसानों को निराशा ही मिली है। हाल यह है कि गोनामऊ से निकली अतरहर माइनर में मात्र 700 मीटर ही पानी रेंग सका और पूरी माइनर सुखी पड़ी रही है।
खीरों माइनर, खानपुर खुष्टी माइनर, बकुलिहा माइनर , सकतपुर माइनर, दुकनहा माइनर, निहस्था माइनर सहित दर्जनों अल्पिकाओं मे धूल उड़ रही है। नहरों में पानी लाने के लिए एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने सैकड़ों की संख्या में किसानों के साथ नहरों में पानी लाने के लिए “ पानी दो आंदोलन” करते हुए पद यात्रा भी किया था। एक दो दिन के लिए पानी तो आया लेकिन नतीजा शून्य रहा।
