अशफाक कायमखानी, जयपुर, NIT;
राजस्थान में सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर शीर्ष छूते भ्रष्टाचार की चर्चा तो अक्सर होती ही रहती है। नीचे से लेकर ऊपर तक के अधीकारियों-कर्मचारियों के भ्रष्टाचार करते पकड़े जाने के साथ-साथ जेल की हवा खा रहे है एवं काफी खाकर वापस भी आ चुके हैं फिर भी भ्रष्टाचार कम होने के बजाय निरंतर बढ़ता ही जा रहा है।
हाल ही में भ्रष्टाचार का एक अनेखा मामला सत्तारुढ भाजपा के काफी सीनियर विधायक हबीबूर्रहमान अशरफी की बेटी से खेती की जमीन का नामंतरण करने के लिये उनकी बेटी से चालीस हजार की रिश्वत मुकामी पटवारी द्वारा लेने का मामला विधायक द्वारा नागोर जिला कलेक्टर से मौखिक शिकायत करने के बाद जग जाहिर हुआ है।
सिनियर भाजपा विधायक हबीबूर्रहमान ने नागोर जिला कलेक्टर कुमारपाल गौतम से मिलकर जो शिकायत की है, उसके मुताबिक विधायक बेटी के खेती की जमीन नागोर के बासनी ग्राम पंचायत में थी जिसका नामंतरण भरने की कार्यवाही पटवारी अन्नाराम व कार्यवाहक तहसीलदार उप पंजीयक हेतराम विश्नोई ने अटकाऐ रखते हुये पैसा ना देने की हालत में नामंतरण दूसरे के नाम करने की धमकी देकर चालीस हजार की रिश्वत लेकर नामंतरण करना बताया है। शिकायत के बाद पटवारी को तत्तकाल निलम्बित कर दिया गया है और कार्यवाहक तहसीलदार को निलम्बित करने की कार्यवाही चल रही है। कार्यवाहक तहसीलदार का चार्ज अब उप पंजीयक से लेकर मुंडावा तहसीलदार को दे दिया गया है।
कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान मे भ्रष्टाचार की काली चादर के आगोश मे पूरा स्टेट आता जा रहा है। ज्यों ज्यों दवा देने की कोशिश की जारी है, त्यों त्यों भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच रहा है। इससे अलग हटकर सरकार इन नौकरशाहों व लोकसेवकों को बचाने के लिये काला कानून को वापिस लेने की बजाय उसको लागू करने के लिये आढे-तीरछे बहाने तलाश रही है।
