कासिम खलील, बुलढाणा (महाराष्ट्र), NIT;
पड़ोसी देश बर्मा (म्यांमार) में रोहिंग्या मुसलमानों का खुले आम नरसंहार हो रहा है। यह नरसंहार तत्काल रोके जाने के लिए भारत सरकार बर्मा पर दबाव बनाए तथा बर्मा छोड़ कर आने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में आश्रय दिया जाए, इन मांगों को ले कर बुलढाणा में विशाल मूकमोर्चा निकाल कर जमीअत उलमा-ए-हिन्द बुलडाणा जिला की ओर से जिलाधीश मार्फत देश के प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया।
15 सितंबर को बुलढाणा जिला जमीअत उलमा के नेतृत्व में बुलढाणा की इकबाल चौक से दोपहर 3 बजे मोर्चा निकाला गया जो शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ जिलाधीश कार्यालय पर पहुंचा। निवासी जिलाधीश से मुलाक़ात कर उन्हें अपनी मांग का ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में कहा गया है कि, कोई भी धर्म हिंसा की शिक्षा नही देता है। आज बर्मा में रोहिंग्या मुसलमान सहित वहाँ पर रहने वाले अन्य धर्मीय अल्पसंख्यंक समाज के बच्चे,महिलाएं, युवक एंव बुजुर्गों का कत्ले आम किया जा रहा है। उन्हें ज़िंदा जलाया जा रहा है और उनके घरों को जला कर लूटा जा रहा है। रोहिंग्या मुसलमान इस अन्याय-अत्याचार से डर कर अपनी जान बचाने के लिए बर्मा छोड़ कर पडोसी देशों में पनाह लेने के लिए मजबूर हैं। इन मजबूर और बेसहारा लोगों की मदद के लिए भारत सरकार अपना दिल बड़ा करते हुए उन्हें भारत में आने दे ताकि ये रोहिंग्या मुसलमान व अन्य धर्मीय लोग अपना जीवन भारत में सुख-शान्ति से जी सकें। भारत सरकार अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी समझते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य देशो को साथ ले कर बर्मा सरकार पर दबाव बनाते हुए वहाँ पर हो रहे नरसंहार को रोकने के लिए सख्त भूमिका अपनाए, ऐसी अपेक्षा ज्ञापन के अंत में व्यक्त कीईगई है। ज्ञापन देते समय बुलढाणा जिला जमीअत उलमा के पदाधिकारी, जिले भर से आए मौलाना व सामाजिक नेता गण मौजूद थे। भारी बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में लोग इस मोर्चे में शामिल हुए।
