कांग्रेस को 2018 में मिली बढ़त को बरकरार रखने गांधी परिवार से तीसरे सदस्य के रूप में प्रियंका आएंगी मोहनखेड़ा | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, इन्दौर (मप्र), NIT:

प्रियंका गांधी की सभा कल पहले सोनिया, राहुल, भागवत समेत कई बड़े नेता आ चुके हैं यहां इंदौर धार में भाजपा के चिंतन शिविर व जन आशीर्वाद यात्रा के बाद अब कांग्रेस ने भी जिले में चुनावी आगाज कर दिया है। आदिवासी बहुल क्षेत्र में पांच साल पहले मिली जीत को बरकरार रखने के लिए इस बार गांधी परिवार से तीसरे सदस्य के रूप में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी मोहनखेड़ा आएंगी।

जो जैन संत की समाधि के दर्शन कर टंट्या मामा की 5 फीट की प्रतिमा का अनावरण कर जनसभा करेगी।
खासतौर पर आदिवासी बहुल क्षेत्र धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी व खरगोन विधानसभा की कुल 22 सीटों पर वोट शेयर बढ़ाने के साथ आगामी लोकसभा के लिए 9 जिलों में आने वाली पांच लोकसभा सीटों पर भी फोकस है।

आमसभा के लिए वाटरप्रूफ पंडाल तैयार करने के साथ दो हेलिपेड तैयार किए जा रहे है। मंगलवार को दिल्ली से प्रियंका के कार्यालय की टीम ने आकर हेलिपेड व सभा स्थल का निरीक्षण किया। सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल ने बताया 5 अक्टूबर को मोहनखेड़ा पहुंचने के बाद प्रियंका गांधी सीधे राजगढ़ की कृषि उपज मंडी के सामने टंट्या मामा की 5 फीट की प्रतिमा का अनावरण करेंगी।

यहां से मार्केटिंग सोसायटी पहुंचकर आम सभा लेंगी।
गांधी परिवार की बात करें तो प्रियंका तीसरी ऐसी सदस्य हैं, जो मोहनखेड़ा में होने जा रहे कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल होने आ रही हैं। पहले महावीर जलाशय के लोकार्पण कार्यक्रम में यूपीए सरकार में रहते सोनिया गांधी ने आकर सभा ली थी।

इसके बाद 2013 में मोहनखेड़ा में चिंतन शिविर में राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेताओं से चर्चा की थी। गांधी के दौरे को लेकर दिल्ली से आई टीम ने मप्र कांग्रेस के सह प्रभारी कुलदीप इंदौरा, राष्ट्रीय सचिव सत्यनारायण पटेल एवं विधायक ग्रेवाल के साथ निरीक्षण किया।

1977 में आई थी इंदिरा गांधी, 2000 में सोनिया गांधी, 2014 में भागवत

(1) स्थानीय कांग्रेसी राधेश्याम मुवेल के मुताबिक 1977 में यहां इंदिरा गांधी आई थीं। तब उनका हेलीकॉप्टर खराब हो गया था। वे इंदौर से सड़क मार्ग से आई थीं।

(2) साल 1999- 2000 में सोनिया गांधी और राहुल आए थे। उस समय देश में यूपीए की सरकार थी और सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह थे।

(3) साल 2013 में राहुल गांधी यहां आए थे। जुलाई 2014 में संघ का चिंतन शिविर लगा था। इसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत, सहित अन्य नेता शामिल हुए थे।

(4) 2017 में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य नेता मोहनखेड़ा तीर्थ में पहुंचे थे।

(5) 2017 में सेवादल के कार्यक्रम में फिर राहुल आए थे। तीर्थ क्षेत्र के प्रमुख संत रहे ऋषभ विजय जी से मिलने कई बार नेता गुप्त रूप से भी आते रहे हैं।

धार में 7 में से 5 सीटें कांग्रेस के पास

धार में 7 में से 5 सीटें कांग्रेस के पास हैं। यह क्षेत्र आदिवासी बहुल है। यहां आदिवासी वर्ग से आने वाले विधायकों के साथ जयस भी भाजपा के लिए चुनौती है।
झाबुआ में तीनों सीटें कांग्रेस के पास हैं तो आलीरजपुर में दो में से एक सीट है। खरगोन जिले में खरगोन और कसरावद जबकि बड़वानी में 4 में से 3 सीट कांग्रेस के पास है।

इसी के चलते भाजपा पिछले एक साल से इन क्षेत्रों में पेसा एक्ट, सिकल सेल जैसे मुद्दों पर फोकस किया है।
वहीं मालवा-निमाड़ की 66 सीटों पर पिछले चुनाव में भाजपा के गढ़ वाली 27 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। जो सत्ता वापसी के लिहाज से भी काफी महत्व पूर्ण है।

ये सीटें, जहां भाजपा को ज्यादा चुनौती

धार जिले की धरमपुरी, गंधवानी, मनावर, कुक्षी और सरदारपुर तो खरगोन जिले में खरगोन और कसरावद अब भी कांग्रेस के पास हैं और भाजपा को चुनौती कम नहीं है। यहां भाजपा के प्रत्याशी और रणनीति ही जीत-हार का फैसला करेगी। हालांकि इन क्षेत्रों में भाजपा को जीत नजर आ रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र चुनौती बने हुए हैं। ग्रामीण मतदाताओं को कैसे साधा जाए, इसीलिए पेसा एक्ट के साथ लाड़ली बहना, आवास योजना जैसी जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।


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