नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

17 जुलाई की NIT की रिपोर्ट में हमने स्वच्छ भारत अभियान SBM (ग्रामीण) में नेता और प्रशासन की मिलीभगत से भ्रष्टाचार के लिए बुने अंधियारे जाल को आलोकित किया था, आज हम इसी योजना के शहरी तानेबाने को लेकर बात करेंगे। केंद्र सरकार द्वारा SBM शहरी योजना को 2020 से 2025 तक विस्तार दिया गया है। इसके लिए डेढ़ लाख करोड़ रुपए का फंड निहित किया गया। मोदी सरकार की कोई योजना जमीन पर सफल नहीं हुई लेकिन भाजपा ने अपने प्रचार प्रसार के लिए सारी स्कीम्स को खूब इस्तेमाल किया। प्रत्येक योजना में प्रशासन ने भ्रष्टाचार का एक ऐसा सिस्टम विकसित किया जिससे एक पार्टी एक नेता मजबूत हो।

स्वच्छ भारत अभियान को लेकर मंत्रियों के गृह नगरों को ही देख लीजिए, गिरीश महाजन के जामनेर में SBM शहरी के तहत जितने भी शौचालय बनाए गए हैं उन सब का निर्माण अद्भुत रूप से बेकार है, तमाम शौचालयों के टेंडर खास लोगों को ही बहाल किए गए हैं। सार्वजनिक जगहों में साझा स्तर पर बनाए महिला प्रसाधन गृह में सेनेटरी नेपकिन की लगाई गई मशीनें गायब हो चुकी हैं। 14 करोड़ की लागत से बने बस स्टैंड में महिला एवं पुरुष शौचालय की खिड़कियां आपस में इतनी पारदर्शी कर दी गई हैं की जिसके कारण किसी के निजता का अधिकार सुरक्षित नहीं बचा है। जिले में बने कई शौचालयों के ठेके कार्यकर्ताओं को दिए गए हैं। जामनेर में घंटा गाड़ी आना बंद हो चुकी है, डंपिंग ग्राउंड और साफ-सफाई को लेकर काका – भाऊ टाइप के नेता समझौते की राजनीति से अपना भविष्य तलाशने में लग गए हैं। सूबे की असंवैधानिक सरकार उसमें शामिल CM, DCM, मंत्रियों का जनता के मन में कोई सम्मान नहीं रहा इसलिए जनता मंत्रियों को विकल्प देने की सोच को बढ़ावा देती नजर आ रही है।
